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एक्सक्लूसिव : 12 करोड़ की सीवरेज योजना फिर भी गंगा में गंदगी, उत्तराखंड के पहले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का नहीं हुआ फायदा

Mon, 07 Dec 2020 12:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजेश भट्ट, अमर उजाला, देवप्रयाग
राजेश भट्ट, अमर उजाला, देवप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 07 Dec 2020 12:52 PM IST
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uttarakhand news : 12 crores sewerage scheme yet dirt in Ganga
अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर स्थित देवप्रयाग - फोटो : File Photo

अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर स्थित देवप्रयाग में लगभग 12 करोड़ की लागत से बनी सीवरेज योजना का कोई फायदा नहीं हुआ। करोड़ों खर्च किए जाने के बावजूद गंदगी गंगा नदी में डाली जा रही है। 2016 में प्रदेश का पहला एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया गया था।

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नगर के सबसे अधिक आबादी वाले मेन मार्केट, तहसील, मंदिर मोहल्ला व संगम मार्केट को महज 150 केएलडी के एसटीपी से जोड़ा गया है। वहीं भागीरथी नदी किनारे स्थित एसटीपी की क्षमता कम होने से सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर नदी में गिर रहा।
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गंगा नदी में तीर्थनगरी देवप्रयाग का गंदा पानी न गिरे, इसके लिए वर्ष 2005-06 में लगभग साढ़े 10 करोड़ की लागत से सीवरेज योजना की स्वीकृति मिली थी। योजना के तहत 2016 में बाह बाजार में निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) ने रामकुंड के समीप 1.4 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का सॉयल बायो टेक्नोलॉजी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) आधारित प्रदेश का पहला एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया।
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इस एसटीपी में गंगा, भागीरथी व अलकनंदा नदी के अलग-अलग तटों में बसे बस्तियों का सीवर शोधित होना था, लेकिन इससे पूर्व वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा में बदरीनाथ-केदारनाथ धर्मशाला के नीचे लगभग 20 मीटर सीवर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके चलते यहां भागीरथी नदी से सटकर 150 और 75 केएलडी (किलोलीटर प्रतिदिन) क्षमता के दो एसटीपी बनाकर नगर की सीवरेज लाइन जोड़ने का काम शुरू हुआ। इससे योजना की लागत बढ़कर लगभग 12 करोड़ रुपये हो गई।

सीवर लाइन के चेंबरों से गंदा पानी गंगा में गिरता रहा

पूर्व  जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी नदी किनारे एसटीपी निर्माण न करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके निर्देशों को भी अनदेखा कर दिया गया। नगर के सबसे अधिक आबादी वाले मेन मार्किट, तहसील, मंदिर मोहल्ला व संगम मार्केट को महज 150 केएलडी  के एसटीपी से जोड़ा गया है।  भागीरथी नदी किनारे स्थित एसटीपी की क्षमता कम होने से सीवर का पानी अकसर ओवरफ्लो होकर नदी में गिरता है। 

जबकि पिछले महीने एसटीपी की मोटर खराब होने से एसटीपी से पानी बिना फिल्टर हुए नदी में गिरता रहा। बरसात के दौरान नगर की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब बीच बाजार से लेकर भागीरथी तक बनी सीवर लाइन के चेंबरों से गंदा पानी सीधे नदी में गिरता है।

अंतरराष्ट्रीय हिंदू हेल्प लाइन प्रदेश संयोजक अशोक टोडरिया , गंगा समति के अध्यक्ष माधव मेवाड़ गुरु, बद्रीश युवा पुरोहित संगठन  के प्रवक्ता ऋतिक और विनोद बडोला का कहना है कि जनता भागीरथी नदी के एसटीपी को स्थानांतरित करने की मांग करती आ रही है।

इसके अलावा क्षतिग्रस्त सीवर लाइन की मरम्मत कर पूर्व की भांति नगर का सीवर मुख्य एसटीपी में जा सकता था।, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। संगम स्थल से 100 मीटर पहले बने एसटीपी से नदी में गिरते गंदे पानी को देखकर देश विदेश से आने वाले तीर्थ यात्री भी अच्छा संदेश लेकर नहीं जाते हैं। 

ओवरफ्लो की समस्या के समाधान के लिए भागीरथी झूला पुल के समीप मिनी एसटीपी बनाने की योजना है। क्षतिग्रस्त सीवर लाइन की मरम्मत का कोई प्रस्ताव नहीं है।
- वीरेंद्र भट्ट, सहायक अभियंता जल संस्थान देवप्रयाग

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