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उत्तराखंड: रेंग-रेंग कर चल रहा राज्य में 10 रोपवे बनाने का काम, पढ़ें 13 जिले के 13 रिपोर्टर की खास रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 15 Sep 2021 01:06 PM IST

सार

प्रदेश में हरिद्वार में चंडी देवी रोपवे, मां मनसा देवी रोपवे, मल्लीताल नैनीताल रोपवे, देहरादून में सहस्रधारा रोपवे, जोशीमठ में औली रोपवे, टिहरी में कैंपटी फॉल, मसूरी रोपवे और भट्टा गांव मसूरी समेत कुल आठ रोपवे संचालित हो रहे हैं। सभी चालू हालत में हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

उत्तराखंड में देहरादून (पुरकुल गांव) से मसूरी (लाइब्रेरी चौक), कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर, ठुलीगाड़ से पूर्णागिरि, जानकी चट्टी (खरसाली) से यमुनोत्री, रानी बाग से नैनीताल, गौरीकुंड से केदारनाथ, गोविंद घाट से हेमकुंड, झलपाडी से दीवाडांडा, कीर्तिखाल से भैरव गढ़ी और क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर तक रोपवे बनाए जाने हैं। इनके निर्माण फिलहाल अलग-अलग चरणों में हैं। लेकिन ज्यादातर का निर्माण कछुए की रफ्तार पर चल रहा है।  प्रदेश में हरिद्वार में चंडी देवी रोपवे, मां मनसा देवी रोपवे, मल्लीताल नैनीताल रोपवे, देहरादून में सहस्रधारा रोपवे, जोशीमठ में औली रोपवे, टिहरी में कैंपटी फॉल, मसूरी रोपवे और भट्टा गांव मसूरी समेत कुल आठ रोपवे संचालित हो रहे हैं। सभी चालू हालत में हैं। बीते माह ही लोनिवि व पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने पर्यटन, ब्रिडकुल, वन विभाग और लोनिवि के अधिकारियों के साथ बैठक रोपवे निर्माण की प्रगति जानी थी और दिशा निर्देश जारी किए थे।
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घोषणा के बाद भी अलग रोपवे सेल का नहीं हो पाया गठन 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों सड़कों और रोपवे के संबंध में सचिवालय में आयोजित एक बैठक में रोपवे कनेक्टिविटी नेटवर्क बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग में रोपवे सेल बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन शासनादेश न होने के कारण अभी तक इस सेल का गठन नहीं हो पाया है।


दून : मंजूरी मिलते ही शुरू होगा दून-मसूरी एरियल रोपवे का काम
दून से मसूरी तक एरियल पैसेंजर रोपवे का सपना जल्द ही साकार होगा। योजना में आ रही सभी बाधाएं लगभग पूरी हो चुकी है। इंतजार है तो सिर्फ केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की स्वीकृति की। स्वीकृति मिलती ही रोपवे का काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर तक योजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है। दून-मसूरी के प्रस्तावित रोपवे को विश्व का पांचवां सबसे लंबा मोनो-केबिल डिटैचेबल पैसेंजर रोपवे माना जा रहा है। इसकी लंबाई करीब पांच किलोमीटर है। निर्माण पूरा होने से दून से मसूरी की दूरी मात्र बीस मिनट रह जाएगी। करीब 258 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की लगभग सभी बाधाएं पूरी हो चुकी हैं। योजना में सबसे बड़ी बाधा लैंड ट्रांसफर की थी। इसे सुलझा लिया गया है। डिप्टी डायरेक्टर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषदऔर योजना का काम देख एसएस सामंत ने बताया कि विभाग की साल के अंत तक योजना पर काम शुरू करने की योजना है। कहा कि लगभग सभी बाधाएं पूरी हो चुकी है। 

चमोली: तीन साल से नहीं हुआ घांघरिया-हेमकुंड रोपवे का निर्माण
जनपद में जोशीमठ-औली रोपवे का संचालन जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) की ओर से किया जा रहा है। जिले में हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर घांघरिया से हेमकुंड तक की छह किलोमीटर की पैदल दूरी को कम करने के लिए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने वर्ष 2018 में यहां रोपवे निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। रोपवे के टावर व अन्य सामग्री एक वर्ष पूर्व घांघरिया क्षेत्र में रखी गई थी। रोपवे न होने से हेमकुंड साहिब के तीर्थयात्रियों को 19 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है। 

नई टिहरी: धीमी गति से चल रहा सुरकंडा रोपवे का निर्माण
जिले में एक मात्र टिपरी-मदननेगी रोपवे का संचालन हो रहा है। टिहरी बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र के लोग इस रोपवे से झील से आरपार आवागमन करते हैं। सात सीटर इस रोपवे का संचालन 2015 से सिडकुल निरंतर करता आ रहा है, जबकि स्यांसू-भल्डिायाणा रोपवे का संचालन दिसंबर 2020 से ठप है। वहीं, सुरकंडा रोपवे का निर्माण बेहद धीमी गति से हो रहा है। बांध प्रभावित क्षेत्र के लिए 8 नवंबर 2020 को डोबरा-चांठी पुल के लोकार्पण के बाद स्सांयू-भल्डियाणा रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया है। शासन स्तर पर अब स्यांयू-भल्डियाणा रोपवे पर्यटन विभाग को सौंपने की कवायद चल रही है। वहीं सिद्धपीठ सुरकंडा के लिए कद्दूखाल से 2014-15 से पीपीपी मोड पर रोपवे का निर्माण चल रहा है। 13 करोड़ की लागत से बनने वाले कद्दूखाल-सुरकंडा रोपवे का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। जनवरी 2019 तक रोपवे का संचालन शुरू होना था, लेकिन 80 फीसदी कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। रोपवे न होने के कारण सिद्धपीठ सुरकंडा के दर्शनों के लिए जाने वाले वृद्ध और दिव्यांग लोग आसानी से मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। 
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