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नई आबकारी नीति की तैयारी, राजस्व बढ़ाने पर फोकस
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 21 Jan 2016 09:28 AM IST
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पिछले साल उत्तराखंड सरकार ने जिस आबकारी नीति के भरोसे सरकारी खजाने को भरने के दावे किए थे उसमें इस साल बदलाव की तैयारी है।
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आबकारी आयुक्त की अगुवाई में विभाग के आला अफसर नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार करने में जुट गए हैं। साथ ही अफसरों की पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है, जो तमाम पहलुओं पर विचार कर रही है। आबकारी आयुक्त ने 27 जनवरी को समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें नई आबकारी नीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
वर्तमान आबकारी नीति को लागू करते समय उपजे विवाद के चलते इस बार नई नीति तैयार करने में अफसर खासी सतर्कता बरत रहे हैं। बकौल आबकारी आयुक्त बीके संत नई नीति में राजस्व बढ़ाने से जुड़े तमाम पहलुओं पर पूरा फोकस होगा।
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आगामी वित्तीय वर्ष में राजस्व वसूली लक्ष्य को 1800 करोड़ से और अधिक बढ़ाया जा सकता है। चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 1800 करोड़ राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन 31 दिसंबर तक 1365 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य ही हासिल किया जा सका है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो शराब की बिक्री में सालाना 2.1 फीसदी की वृद्धि हुई है तो निर्धारित लक्ष्य दस प्रतिशत से कम है।
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कोर्ट चले गए थे कारोबारी
पिछले साल सरकार की ओर से जारी आबकारी नीति को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने जबरदस्त हो-हल्ला मचाया था। वहीं, सरकार ने आबकारी नीति को बेहद पारदर्शी बताते हुए राजस्व के लिहाज से बेहद असरकारी बताया था। इसी आबकारी नीति के खिलाफ कुछ शराब कारोबारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और सरकार को अदालत में अपना पक्ष रखना पड़ा था।