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विधायक के बेटे ने खोजा कुटीर उद्योग में करियर, एक कमरे से की शुरुआत

Fri, 04 Jan 2019 09:03 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, हल्द्वानी
चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 04 Jan 2019 09:03 AM IST
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uttarakhand MLA son pursue career in cottage industry
mushroom

लालकुआं क्षेत्र से विधायक नवीन दुम्का के बेटे शैलेंद्र ने राजनीति में प्रवेश करने के बजाए मशरूम उत्पादन जैसे कुटीर उद्योग में बेहतर भविष्य की संभावनाएं तलाशी हैं। रोजाना आठ से दस किलो मशरूम उत्पादन कर रहे विधायक पुत्र ने नए साल में रोजाना एक से डेढ़ क्विंटल मशरूम उत्पादन का लक्ष्य तय किया है।

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विधायक दुम्का के दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों और बेटे शैलेंद्र का विवाह हो चुका है जबकि छोटा बेटा मुकेश बमेटा बंगर खीमा का ग्राम प्रधान है। स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके शैलेंद्र ने पढ़ाई के बाद स्वरोजगार की ठानी। स्वरोजगार से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी जुटाई तो उद्यान विभाग की मशरूम उत्पादन योजना पसंद आई। शैलेंद्र ने पिछले साल सितंबर में ज्योलीकोट स्थित इंडोडच मशरूम परियोजना में तीन दिन का मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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प्रशिक्षण प्राप्त करने के तुरंत बाद ही शैलेंद्र ने घर में ही 15 गुणा 8 फुट के कमरे में एक टन कंपोस्ट पर मशरूम उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में वह कंपोस्ट से भरे 75 बैगों में रोजाना आठ से दस किलो बटन मशरूम पैदा कर रहे हैं।

शैलेंद्र ने बताया कि दस किलो तक मशरूम को वह स्थानीय बाजार में ही बेच देते हैं। यदि  इससे अधिक उत्पादन हुआ तो उसे हल्द्वानी स्थित मंडी में ले जाते हैं। जहां उन्हें 80-100 रुपये प्रति किलो तक का भाव आसानी से मिल जाता है। जबकि खुले बाजार में बटन मशरूम की बिक्री 200-225 रुपये किलो तक होती है। उन्होंने बताया कि इस कुटीर उद्योग को शुरू करने में केवल 17 हजार रुपये की लागत आई है। 

अनुदान देता है विभाग

शैलेंद्र ने बताया कि उद्यान विभाग 50 फीसदी अनुदान पर कंपोस्ट उपलब्ध कराता है साथ ही उसे प्रोजेक्ट स्थल तक लाने में भी 50 फीसदी का अनुदान देता है। वह बताते हैं कि एक टन कंपोस्ट पर वह कम से सम 150 से 175 किलो तक मशरूम उत्पादन कर लेंगे।

 

शैलेंद्र का कहना है कि मशरूम उत्पादन से बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है, क्योंकि यह कम लागत और कम समय में लाभ देने वाला व्यवसाय है। वह कहते हैं कि बाजार में मशरूम की खूब मांग है।

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