{"_id":"5f329a9e8ebc3e3d0d55b05c","slug":"uttarakhand-minister-satpal-maharaj-sent-a-letter-to-union-communications-minister-to-issue-the-postage-stamp-on-ramlila","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामलीला मंचन पर डाक टिकट जारी करने के लिए मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय संचार मंत्री को भेजा पत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलीला मंचन पर डाक टिकट जारी करने के लिए मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय संचार मंत्री को भेजा पत्र
Wed, 12 Aug 2020 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 12 Aug 2020 01:00 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : सांकेतिक (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में सदियों से हो रहे रामलीला मंचन को अब डाक टिकट के माध्यम से पहचान दिलाने के लिए सरकार ने पहल की है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अल्मोड़ा, पौड़ी जिले के सुमाड़ी और चमोली जिले के डिंमर गांव की रामलीला मंचन पर डाक टिकट जारी करने के लिए केंद्र को पत्र भेजा है।
विज्ञापन
उत्तराखंड में प्रदेश के हर मोहल्लों में अलग-अलग समय पर रामलीला का मंचन किया जाता है। लेकिन अल्मोड़ा में 150 साल पहले शुरू हुई रामलीला का मंचन अभी भी किया जाता है। वहीं, पौड़ी जिले के सुमाड़ी गांव में 140 साल और चमोली जिले के डिंमर गांव में 102 साल से रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
विज्ञापन
खास बात ये है कि डिंमर गांव की रामलीला का मंचन बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने से पहले किया जाता है। अल्मोड़ा की रामलीला को यूनेस्को ने भी विश्व धरोहर सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है।
विज्ञापन
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पौराणिक रामलीलाओं को सम्मान और पहचान दिलाने के लिए पहल की है। 100 से 150 साल पुरानी रामलीलाओं पर डाक टिकट जारी करने के लिए केंद्रीय संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद को पत्र भेजा है।
डाक टिकट जारी होने से रामलीलाओं को सम्मान मिलेगा। महाराज ने कहा कि रामलीला का मंचन हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इनका संरक्षण और संवर्द्धन किया जाएगा। ताकि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति को जानने का अवसर मिल सके।