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धन सिंह की राह, कुछ नया कर गुजरने की चाह
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 21 Jun 2017 01:02 PM IST
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dhan singh rawat
- फोटो : file photo
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सहकारिता, उच्च शिक्षा और दुग्ध विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत, टीएसआर (त्रिवेंद्र सिंह रावत) सरकार के सबसे चर्चित मंत्रियों में से एक हैं। मंत्री पद का कार्यभार संभालते ही धन सिंह ने लीक से हटकर कुछ नए फैसले लिए हैं। वे अपने कई फैसलों को लेकर चर्चा में भी रहे। देहरादून में सात दिवसीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन कर अपनी धमाकेदार मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद दुग्ध जागरूकता सप्ताह का आयोजन कर लोगों को शुद्ध दूध पीने के प्रति जागरूक किया।
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धन सिंह ने अपने विभागों का कायाकल्प करने की पूरी योजना तैयार कर रखी है। इस पर उन्होंने अमल करना भी शुरू कर दिया है। उनकी योजना प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शैक्षिक सत्र को नियमित करना, सहकारिता से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना और दुग्ध संघों को घाटे से उबारना है। सरकार बनने से अब तक के कामकाज को लेकर डॉ. धन सिंह रावत ने अमर उजाला के मुख्य संवाददाता कृष्णेंदु कुमार ने बात की। मंत्री का कहना है कि वह पीएम और सीएम की योजनाओं को जनता के बीच पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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उपलब्धियों के दावे
-सात दिवसीय सहकारिता मेले का आयोजन। इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह सहित प्रदेश के सभी मंत्रियों ने भाग लिया।
-सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 1800 करोड़ रुपये दिया।
-759 पैक्स समितियों को कंप्यूटराइज्ड करने की योजना पर अमल शुरू।
-सहकारी बैंकों को कंप्यूटराइज्ड करने और एटीएम लगाने की योजना शुरू।
-दुग्ध समितियों को घाटे से उबारने के लिए केंद्र ने दिया 20.66 करोड़ का पैकेज।
-दुग्ध समितियों के आधुनिकीकरण की योजना शुरू।
-सभी महाविद्यालयों में प्राचार्यों की तैनाती।
-पहली बार महाविद्यालयों में शौर्य दीवार बनाने की शुरुआत।
-महाविद्यालयों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को अनिवार्य बनाया जा रहा है।
-महाविद्यालयों में ड्रेस कोड पर अमल कराने की कवायद शुरू।
- मैंने अपने विभागों से संबंधित कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिन पर अमल शुरू कर दिया है। परिणाम आने शुरू हो गए हैं। सहकारिता की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। जो दुग्ध समितियां घाटे में चल रही थीं, उनका नुकसान कम होने लगा है। महाविद्यालयों में नियमित रूप से पढ़ाई होने लगी है। महाविद्यालयों में दाखिले ऑनलाइन होंगे। अनुसूचित जाति के होनहार विद्यार्थियों के लिए फ्री कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है ताकि वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकें। प्रदेश सरकार एक कॉपर्स फंड बनाकर एक सौ छात्रों को पीएचडी कराएंगी। अभी तो आगाज है, आने वाले दिनों में नई-नई योजनाएं शुरू की जाएंगी।
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विजन डाक्यूमेंट
-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं की स्नातकोत्तर स्तर की निशुल्क शिक्षा।
-सभी विश्वविद्यालयों में मुफ्त वाईफाई।
-शासकीय और अशासकीय डिग्री कालेज में शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति।
-संस्कृत, ज्योतिष और कर्मकांड के अध्ययन व शोध को बढ़ावा।
सहकारी बैंक के कामकाज में पहले अधिक सुधार हुआ है। बैंक की सभी शाखाएं अगर सीबीएस हो जाएं तो ग्राहकों को और सहूलियत हो जाएगी। एटीएम की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। सहकारी बैंक की सेवाओं को निजी बैंकों की तर्ज पर बनाया जाना चाहिए। इससे बैंकों का कामकाज तो सुधारेगा ही साथ ही बैलेंसशीट भी मजबूत होगी।
- चंदा ममगाई, राजेंद्र नगर, देहरादून
सहकारी बैंक की शाखाओं में कामकाज को चुस्त-दुरुस्त बनाए जाने की आवश्यकता है। सहकारी बैंक की शाखाओं के कर्मचारियों का व्यवहार ग्राहकों के प्रति रूखा होता है। कर्मचारियों को इस बात में ट्रेनिंग दिए जाने की आवश्यकता है। साथ ही बैंक की शाखाओं में अधिक से अधिक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
- विपिन चौहान, शक्ति विहार (माजरा)