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Uttarakhand: प्रदेश में एक जुलाई से मदरसा बोर्ड होगा खत्म, मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ेंगे हजारों बच्चे

Mon, 29 Jun 2026 09:53 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 29 Jun 2026 09:53 PM IST
सार

Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस साल फरवरी में मदरसा बोर्ड खत्म करने की घोषणा की थी। उन्होंने जुलाई से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में लाने के निर्देश दिए थे।

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Uttarakhand Madrasa Board to be abolished from July 1 thousands of children to join mainstream education
मदरसा के बच्चे - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड एक जुलाई को खत्म हो जाएगा। इसके बाद राज्य के मदरसों में राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होगा। इससे मदरसों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र मान्य होंगे।

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राज्य में वर्ष 2011 में मदरसा बोर्ड के गठन को मंजूरी मिली थी। हालांकि 15 साल बाद भी इसे राज्य शिक्षा बोर्ड के समकक्ष मान्यता नहीं मिल पाई। इसी कारण मदरसों में बच्चों की संख्या तेजी से कम होती जा रही थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस साल फरवरी में मदरसा बोर्ड खत्म करने की घोषणा की थी।
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उन्होंने जुलाई से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में लाने के निर्देश दिए थे। साथ ही उनकी मान्यता उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से किए जाने को कहा था। इन निर्देशों के बाद अब मदरसा बोर्ड खत्म हो रहा है। इसके बाद सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता लेनी होगी। उन्हें राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी लागू करना होगा।
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शैक्षिक प्रमाणपत्रों का महत्व बढ़ेगा
राज्य मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि राज्य शिक्षा बोर्ड से मान्यता मिलने से छात्रों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का महत्व बढ़ेगा। वर्तमान में तहतानिया, फौकानिया, मुंशी, मौलवी और आलिम के प्रमाणपत्रों को समकक्ष मान्यता नहीं थी। इस कारण छात्र सरकारी नौकरियों में इनका उपयोग नहीं कर पा रहे थे। अब शिक्षा विभाग से मान्यता के बाद ये प्रमाणपत्र विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए मान्य होंगे। इससे मदरसों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

छात्र संख्या हुई कम, कर्मचारियों के भविष्य पर भी असमंजस
प्रदेश के मदरसों में छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से कम हो रही है। शैक्षिक सत्र 2023-24 में कुल 45808 छात्र थे, जबकि 2024-25 में मुंशी, मौलवी और आलिम करने वाले छात्रों की संख्या काफी घट गई। वहीं, मदरसा बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर असमंजस है। कुछ कर्मचारी पीआरडी और कुछ उपनल के माध्यम से कार्यरत हैं। वे सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।

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