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Uttarakhand: धराली आपदा से सबक, गंगोत्री के पुरातन मार्ग विकसित करने पर फोकस, प्रस्ताव वन विभाग को भेजा
Sun, 05 Jul 2026 12:18 PM IST
Alka Tyagi
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Alka Tyagi
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:18 PM IST
सार
धराली आपदा के समय मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा था, इससे आवागमन कई दिनों तक प्रभावित रहा था। ऐसी स्थिति से निपटने को लेकर वैकल्पिक मार्ग को तैयार करने की योजना पर नए सिरे से कोशिश को तेज की है।
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धराली आपदा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी(फाइल फोटो)
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विस्तार
धराली आपदा के दौरान गंगोत्री मार्ग कई दिनों तक बंद रहा था। इसके दृष्टिगत वैकल्पिक मार्गाें पर फोकस बढ़ाया गया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मार्ग का इस्तेमाल किया जा सके। इसी के तहत उत्तरकाशी जिले में सूखी गांव से लेकर जांगला तक के पैदल मार्ग को विकसित करने की योजना है।
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इसके लिए नए सिरे से वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार कर वन महकमे के पास भेजा गया है। धराली आपदा के बाद से आपदा प्रबंधन के क्षेत्र को और सुदृढ़ करने के कदम उठाएं जा रहे हैं। इसके साथ ही आपदा के समय आईं चुनौतियों और मुश्किलों से मिले अनुभव के आधार पर उससे निपटने की कोशिश के तहत संसाधनों को जुटाया जा रहा है। धराली आपदा के समय मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा था, इससे आवागमन कई दिनों तक प्रभावित रहा था।
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ऐसी स्थिति से निपटने को लेकर वैकल्पिक मार्ग को तैयार करने की योजना पर नए सिरे से कोशिश को तेज की है। इसी के तहत उत्तरकाशी जिले में सूखी गांव, हर्षिल, धराली तक 18 किमी का पुरातन मार्ग था, उसकी सुध ली गई है। बताया जाता है कि इस मार्ग का इस्तेमाल धाम में पहुंचने के श्रद्धालु उस दौर में करते थे, जब वर्तमान मार्ग नहीं बना और सुविधाएं नहीं थीं। अभी यह पैदल मार्ग है। यह मार्ग विकसित होता है तो नदी के एक तरफ जहां नेशनल हाईवे वाला मार्ग रहेगा, तो दूसरी तरफ इस मार्ग का विकल्प रहेगा। जिससे किसी भी मुश्किल समय इस्तेमाल किया जा सकेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
लोनिवि सचिव डॉ.पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि यह पैदल मार्ग काफी पुराना है, जिसका इस्तेमाल पहले श्रद्धालु धाम पहुंचने के लिए करते थे। इस मार्ग को बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य बताते हैं कि इस मार्ग को लेकर पहले कोशिश हुई थी पर प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा था। अब नए सिरे से वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार कर वन महकमे के पास भेजा गया है। इससे जुड़ी प्रक्रिया चल रही है। इस मार्ग को बेहतर करने और वाहन संचालन योग्य बनने से काफी लाभ होगा। लोनिवि विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा के अनुसार इस मार्ग को विकसित करने से कई क्षेत्रों मे मदद मिलेगी, इसको लेकर प्रयास किया जा रहा है।