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उत्तराखंड: आईटीबीपी का जवान डोकलाम में शहीद, सोमवार को शव घर पहुंचने की उम्मीद

Sun, 13 Sep 2020 09:44 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किच्छा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किच्छा Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 13 Sep 2020 09:44 PM IST
सार

  • तबीयत बिगड़ने से अस्पताल ले जाने पर तोड़ा दम 
  • सोमवार दोपहर बाद तक शव के घर पहुंचने की उम्मीद

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Uttarakhand: ITBP soldiers martyred in Doklam near china border
शहीद जमीर अहमद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में किच्छा निवासी आईटीबीपी जवान जमीर अहमद (54) की चीन सीमा से सटे डोकलाम में शहीद हो गए। बीमारी के चलते शनिवार को उनकी मौत हो गई। आईटीबीपी के अधिकारियों ने परिजनों को सोमवार दोपहर बाद तक शव के किच्छा पहुंचने की जानकारी दी है। शाम को पूरे सम्मान के साथ जवान को शव सुपुर्दे खाक किया जाएगा। जवान की मौत की सूचना से परिजनों में कोहराम मच गया है। 

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शहीद जमीर अहमद के पुत्र सनाउल मुस्तफा ने बताया कि उनके पिता 12 दिसंबर 2019 को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे और तब से वे वहीं तैनात थे। उनसे फोन पर हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी ड्यूटी कहीं ऊंची पहाड़ियों पर लगी थी, जिसके कारण उनसे संपर्क कम हो गया था। बीते शनिवार को सुबह उन्हें आईटीबीपी के अधिकारी का फोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके पिता की अचानक तबीयत खराब हो गई थी, जिस पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। 
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सेना के अधिकारी ने सनाउल को बताया कि शहीद जवान का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह हवाई जहाज से दिल्ली लाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग से घर पहुंचाया जाएगा। जमीर अहमद की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर शहीद के कई रिश्तेदार उनके आवास पर पहुंच गए। शहीद की पत्नी नूरजहां, बेटी शहनाज और तरन्नुम के अलावा पुत्र सनाउल मुस्तफा का रो-रो कर बुरा हाल है। 

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मूलरूप से बरेली के रहने वाले थे जमीर अहमद 

दोकलम में शहीद जमीर मूलरूप से बरेली (यूपी) की तहसील बहेड़ी के ग्राम गननगला के रहने वाले थे। पुत्र सनाउल के अनुसार पिता की चंडीगढ़, मानेसर, देहरादून, दिल्ली आदि स्थानों पर जहां-जहां नौकरी रही, परिवार उनके साथ ही रहा। बाद में किच्छा के वार्ड 15 में मकान बनाने के बाद परिवार वहीं रहने लगा।

दो वर्ष पूर्व एक पुत्र की हो चुकी है मौत 
शहीद जहीर अहमद के एक पुत्र की बीमारी के चलते दो वर्ष पूर्व भोजीपुरा में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उनकी बड़ी बेटी तरन्नुम का निकाह हो चुका है जबकि छोटी बेटी शहनाज सूरजमल कॉलेज में बीएड कर रही है। शहीद का बेटा सनाउल मुस्तफा सिविल इंजीनियरिंग कर चुका है और अपने भाई की मौत के बाद से बाद घर पर ही रह रहा है। इधर, शहीद की बेटी शहनाज ने बताया कि बीते शुक्रवार को दिन में उसकी अपने पिता से फोन पर बात हुई थी। शहनाज ने बताया कि सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक उनका बीएड का पेपर है।  परीक्षा देने के बाद पिता की अंतिम विदाई में शामिल होंगी। 

एनएसजी में तीन वर्ष रहे थे जमीर अहमद 
डोकलाम में शहीद हुए किच्छा के लाल जमीर अहमद वर्ष 2009 से 2012 तक राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) में रहे थे। सनाउल ने बताया कि पिता के एनएसजी में रहने के दौरान परिवार उनके साथ दिल्ली के निकट मानेसर में ही रहता था।

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