उत्तराखंडः कुंभ कार्य में लापरवाही पर सिंचाई विभाग के तीन इंजीनियर निलंबित
- एससी शरद के मामले की जांच करेगा लोक निर्माण विभाग, टेंडर में गड़बड़ी का है आरोप
- एक्सईएन पुरुषोत्तम के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित, तीनों अधिकारी किए गए अटैच
- सीएम के सख्त रुख के बाद हरकत में आया शासन, दो और इंजीनियरों के खिलाफ जांच जारी
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कुंभ के कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में सिंचाई विभाग के तीन इंजीनियरों को शासन ने मंगलवार को निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री के सख्त तेवर के बाद हरकत में आए सिंचाई विभाग ने तीनों को अलग-अलग कार्यालयों से अटैच किया है।
हरद्विार में कुंभ मेले के निर्माण कार्य के टेंडरों में कई अनियमितताएं मिलने पर एससी शरद श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। उन्हें सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। उनके कार्यकाल में जारी टेंडरों की शासन ने जांच कराई तो पाया गया कि निर्माण कार्य धीमा हुआ और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई।
उनपर यह भी आरोप है कि उन्होंने निरीक्षण का काम ढंग से नहीं किया। शासन अब इस मामले की विस्तृत जांच लोक निर्माण विभाग से कराएगा। शरद की तैनाती 26 दिसंबर 2019 को की गई थी। शासन ने उन्हें सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय से अटैच किया है।
दो इंजीनियरों के खिलाफ जांच जारी
वहीं, एक्सईएन पुरुषोत्तम, सिंचाई खंड हरिद्वार को कार्यों को टुकड़ों में बांटने, गुणवत्ता की नियमित जांच न करने और कार्य की धीमी प्रगति के आधार पर निलंबित किया गया है। पुरुषोत्तम के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। उन्हें सिंचाई खंड हरिद्वार से अटैच किया गया है।
उधर, शासन ने टेंडर समय से पहले खोलने के आरोप में सिंचाई कार्य पुनर्वास मंडल ऋषिकेश, प्रेम सिंह पंवार को निलंबित किया है। उन्हें 26 दिसंबर 2019 को सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। पंवार को प्रमुख अभियंता कार्यालय सिंचाई विभाग में अटैच किया गया है। सिंचाई सचिव डॉ.भूपिंदर कौर औलख ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक कुंभ कार्याें में लापरवाही बरतने के आरोप में अभी और दो इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई पर शासन में विचार किया जा रहा है। दोनों के मामलों में जांच अभी जारी है। बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री ने कुंभ कार्य की समीक्षा के दौरान धीमी गति से कार्य होने पर नाराजगी जताई थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था।