हाईकोर्ट ने बरती सख्ती, कहा ‘एक राष्ट्रीय संस्थान प्रदेश से बाहर जा रहा, सरकार को जरा भी दुख नहीं’
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) पर केंद्र और प्रदेश सरकार के जवाब से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के राज्य से बाहर जाने से प्रदेश सरकार को जरा भी दुख नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने इस मामले में मंगलवार को कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि प्रदेश सरकार इस संस्थान के लिए प्रदेश में उपयुक्त स्थान की तलाश नहीं कर पा रही है।
एनआईटी के छात्रों को जयपुर शिफ्ट करने के विरोध में संस्थान के पूर्व छात्र जसवीर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और एनआईटी प्रबंधन ने जवाब दाखिल किया।
केंद्र सरकार ने इस जवाब में साफ कहा कि प्रदेश सरकार स्थान की तलाश नहीं कर पा रही है। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई और कहा कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के प्रदेश से बाहर जाने से प्रदेश सरकार को कोई दुख नहीं हो रहा है। खंडपीठ ने याची को दो सप्ताह के भीतर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए।
नौ साल बाद भी एनआईटी के पास अपनी जमीन नहीं
एनआईटी उत्तराखंड को केंद्र सरकार ने 2009 में स्वीकृति दी थी। 2010 में यहां प्रवेश शुरू हुए और इस समय यहां नौ सौ से अधिक छात्र हैं। नौ साल बाद भी इस संस्थान के पास अपनी भूमि नहीं है और श्रीनगर में एनएच 58 के किनारे के एक प्लॉट में यह संचालित किया जा रहा है। कुछ समय पहले ही अव्यवस्था को लेकर छात्र बेमियादी हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद यहां के कुछ छात्रों को जयपुर एनआईटी में भी शिफ्ट किया गया।
एनआईटी परिसर के लिए 120 हेक्टेयर जमीन दान दी है गांववालों ने
देश सरकार ने पूर्व में सुमाड़ी, नियाल गांव में एनआइटी के लिए जमीन चिह्नित की थी। इस गांव के लोगों ने भी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर पक्षकार बनाने की मांग की हुई है। सुमाड़ी में चिह्नित जमीन की बाउंड्री वॉल चार करोड़ की लागत से कराई गई लेकिन इस जमीन को संस्थान के लिए अनुपयुक्त करार दिया गया। अब गांव के लोगों का आरोप है कि संस्थान को मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। एनआईटी परिसर के लिए 120 हेक्टेयर जमीन दान गांव वालों ने दान दी है।