प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-कार्रवाई करने को सरकार सक्षम
- सरकार ने कोर्ट में कहा-हड़ताल खुलवाने के किए जा रहे हैं प्रयास
विस्तार
प्रमोशन में आरक्षण को लेकर उत्तराखंड जनरल-ओबीसी एम्प्लाइज एसोसिएशन की हड़ताल के मामले में दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने निस्तारित करते हुए कहा है कि हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार सक्षम है।
कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि हड़ताल खुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
देहरादून निवासी ललित कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इम्प्लाइज एसोसिएशन के करीब डेढ़ लाख कर्मचारी पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ दो मार्च से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की हड़ताल से सभी राजकीय कार्य बाधित हो रहे हैं।
हड़ताली कर्मचारी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। याची की मांग है कि या तो कर्मचारी हड़ताल वापस लें या हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार सक्षम है।
धान घोटाले के मामले में सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने रुद्रपुर धान मिल से कोटद्वार स्टेट पूल डिपो में भेजे गए धान में हुए घोटाले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सहारनपुर निवासी अवनीश जैन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऊधमसिंह नगर की राइस मिल से कोटद्वार स्टेट पूल डिपो में धान भेजने के बहाने लाखों का घोटाला किया गया है। याचिका में कहा कि पूर्व में अपर सचिव की जांच में भी अनियमितताएं पाई गईं थी, लेकिन अभी तक इस प्रकरण पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में यह भी पता चला कि जिन वाहनों से धान भेजा गया था उन वाहनों पर दोपहिया वाहनों के नंबर थे। याचिकाकर्ता ने धान घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।