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कार्बेट में बाघों की सुरक्षा में सरकार की हीलाहवाली पर हाईकोर्ट सख्त, कहा एनटीसीए संभाले जिम्मा

Thu, 23 Aug 2018 10:09 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Thu, 23 Aug 2018 10:09 PM IST
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Uttarakhand high court order to ntca for Tigers Protection
nainital high court - फोटो : google

जिम कार्बेट पार्क में बाघों की सुरक्षा में सरकार की हीलाहवाली से नाराज हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से पूछा है कि जब तक राज्य सरकार अपने दायित्वों के प्रति जागरूक नहीं होती और ठोस फैसले लेना शुरू नहीं करती, क्या तब तक वह कार्बेट का प्रबंधन संभाल सकती है। कोर्ट ने कार्बेट के कोर और बफर जोन में बाघों के संरक्षण के लिए संभावित ठोस उपाय की रिपोर्ट भी एनटीसीए से तीन माह में देने को कहा है।  

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हिमायन युवा ग्रामीण विकास समिति की कार्बेट से संबंधित याचिका पर बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कई तल्ख टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि एनटीसीए रिपोर्ट में यह भी बता सकती है कि कार्बेट से कुछ या सभी बाघों को किसी दूसरे बेहतर प्रबंधन वाले नेशनल पार्क में शिफ्ट किया जाए।
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कोर्ट ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि रामनगर में हाथियों के मामले में जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, कैसे उनमें से चार फरार हो गए। एक को हज पर जाने की अनुमति दे दी गई और एक कनाडा चला गया। कोर्ट ने आरोपियों के विदेश जाने पर एसएसपी नैनीताल से पूछा कि आरोपियों को एफआईआर दर्ज होने के बाद भी क्यों नहीं रोका गया?
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कोर्ट ने कहा कि हमने प्रदेश सरकार से कहा था कि स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) बनाई जाए। सरकार किसी न किसी बहाने से कोर्ट से समय ले रही है और यह नहीं बता रही है कि फोर्स का गठन करने के लिए उसने क्या ठोस कदम उठाए। राज्य सरकार वन गुर्जरों को बचाने के चक्कर में सही शपथ पत्र कोर्ट में पेश नहीं कर रही है।
 

तल्ख टिप्पणियां

Uttarakhand high court order to ntca for Tigers Protection

अपर मुख्य सचिव के कोर्ट में पेश ना होने  को कोर्ट ने आदेश की अवहेलना मानते हुए अगली तारीख में उपस्थित होने को कहा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि सरकार समझ ले कि वह आम नागरिक के अधिकारों की भक्षक नहीं बल्कि रक्षक है। कोर्ट ने मुक्त कराए गए हाथियों को तीन दिन के भीतर कालागढ़ या ढिकाला भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कॉर्बेट पार्क क्षेत्र में फलदार वृक्षों के काटे जाने की अनुमति उद्यान विभाग के अधिकारी द्वारा दिए जाने पर रोक लगाते हुए संबंधित डीएफओ को इसके लिए अधिकृत किया है।

तल्ख टिप्पणियां
एनटीसीए से तीन माह में रिपोर्ट मांगी
बाघों को शिफ्ट करने पर विचार के निर्देश
पेड़ काटने की उद्यान विभाग की अनुमति पर रोक
एसएसपी से पूछा, हाथियों के मामले में नामजद फरार कैसे हो गए
एसटीपीएफ के गठन में बहानेबाजी कर रही सरकार
वन गुर्जरों को बचाने के चक्कर में सही शपथपत्र पेश नहीं कर रही सरकार


वहीं, कोर्ट में पेश की गई पश्चिम वृत्त वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते और वन्य जीव विशेषज्ञ शाह बिलाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कार्बेट के बफर जोन में जहां वन क्षेत्रफल घट गया वहीं आबादी, होटल, रिसॉर्ट्स, औद्योगिक गतिविधियां बढ़ गईं। 1990 में 90 हजार पर्यटकों की तुलना में अब ढाई लाख पर्यटक प्रतिवर्ष यहां आ रहे हैं। ऐसे में बाघों पर खतरा लगातार बढ़ रहा है और मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।
 

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