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उत्तराखंड: हाईकोर्ट का सरकार को आदेश, जबरन फीस मांगने वाले स्कूलों पर करें कार्रवाई

Tue, 12 May 2020 09:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 12 May 2020 09:30 PM IST
सार

  • स्कूलों से कहा-अभिभावकों को फीस जमा करने का नोटिस जारी न करें

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Uttarakhand High court Order to government for Take,Action on schools who demand fees from students
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में लॉकडाउन की अवधि में निजी और सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं से ट्यूशन फीस न लेने के मामले में दायर जनहित याचिका पर हाइकोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि जोे स्कूल जबरन फीस वसूल रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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कोर्ट ने निजी स्कूल संचालकों को भी निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार के 2 मई 2020 के उस आदेश का पालन करें, जिसमें ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क न लेने को कहा गया था। इस आदेश में सरकार ने कहा था कि ट्यूशन फीस भी वही स्कूल ले सकते हैं जो ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं।
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कोर्ट ने निजी स्कूलों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे फीस जमा करने को लेकर अभिभावकों को किसी प्रकार का नोटिस जारी न करें। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
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शिक्षा अधिकारी को बनाएं नोडल अफसर
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षा अधिकारी को नोडल अफसर बनाने के आदेश दिए हैं ताकि अभिभावक जबरन फीस की मांग कर रहे स्कूलों के खिलाफ अपनी शिकायत नोडल अधिकारी के पास दर्ज करा सकें। कोर्ट ने सरकार को आदेश का प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।

यूकेजी और एलकेजी के बच्चों कोे कैसे दे रहे हैं ऑनलाइन शिक्षा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि एलकेजी और यूकेजी कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों को किस तरह से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कितने प्रतिशत बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं तथा कितने स्कूल यह सुविधा दे रहे हैं। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए यह बताने को कहा है कि प्रदेश भर में कितने छात्र छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि उत्तराखंड में स्कूलों और अभिभावकों के पास ऑनलाइन पढ़ाई की क्या सुविधा है।

याचियों ने कहा-पांचवीं तक के बच्चों से न ली जाए कोई फीस
मामले के अनुसार देहरादून निवासी जपिंदर सिंह व आकाश यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि निजी और सरकारी स्कूलों में स्थिति सामान्य होने के बाद ही ट्यूशन फीस ली जाए तथा ट्यूशन फीस के नाम पर अन्य कोई शुल्क न लिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि अगले सत्र में फीस में किसी तरह की वृद्धि न की जाए। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि कक्षा 5 तक के बच्चों से किसी तरह का कोई शुल्क न लिया जाए।

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