{"_id":"5bb64339867a5528d614039a","slug":"uttarakhand-high-court-order-to-all-dm-for-stop-drainage-without-treatment","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने बिना ट्रीटमेंट के गंगा में गिर रहे 65 नालों को तुरंत बंद करने के दिए आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने बिना ट्रीटमेंट के गंगा में गिर रहे 65 नालों को तुरंत बंद करने के दिए आदेश
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
Updated Fri, 05 Oct 2018 08:24 AM IST
विज्ञापन
court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने बिना उपचार के गंगा में गिर रहे 65 नालों को तत्काल बंद करने या उनका रुख बदलने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इन नालों का उपचार समय से किया जाए।
विज्ञापन
गंगा नदी के प्रदूषण के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई में बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने हरिद्वार के 72 घाटों के सफाई के लिए निविदा प्रक्रिया 21 दिनों के भीतर पूरी करने आदेश दिया।
विज्ञापन
कोर्ट ने बिना उपचार के गंगा में गिरने वाले ऋषिकेश, मुनिकीरेती, कीर्तिनगर, श्रीकोट, गंगनाली, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, जोशीमठ, बद्रीनाथ, उत्तरकाशी के नालों का उपचार तय समय में करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस कार्य को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट सहित मार्च 2019 तक को पूरा कर लिया जाए। कोर्ट ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को इन आदेशों के पालन की जिम्मेदारी दी है और राज्य के पेयजल सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
विज्ञापन
पेयजल सचिव की ओर से कोर्ट में पेश किए गए शपथ पत्र में बताया गया कि गंगा के उद्गम स्थल से हरिद्वार तक गंगा के किनारे कई छोटे कस्बे, नगर निगम क्षेत्र और कई गांव हैं। इसके अलावा कई सहायक नदियां भी गंगा में मिलतीं हैं। इन सहायक नदियों का पानी भी दूषित पाया गया है। गंगा और उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले 135 नालों में से 70 नालों का बहाव गंगा एक्शन प्लान फेज एक और दो के तहत रोका जा चुका है।
शेष 65 नालों का उपचार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के अंतर्गत किया जा रहा है। जनहित याचिका में कहा गया था कि गंगा के उद्गम स्थल से हरिद्वार तक गंगा में सैकड़ों नालों का पानी गिरता है। कोर्ट ने पूर्व में पेयजल सचिव को शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अब यह याचिका निस्तारित कर दी है।