फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High court order Remove encroachment from side of highways and roads

Uttarakhand: हाईकोर्ट का आदेश- राजमार्गों और सड़कों के किनारे से हटाएं अतिक्रमण, चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

Wed, 26 Jul 2023 09:44 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 26 Jul 2023 09:44 PM IST
सार

नैनीताल जिले के पदमपुरी और खुटानी में सड़क किनारे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रभात गांधी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पत्र पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की।

विज्ञापन
Uttarakhand High court order Remove encroachment from side of highways and roads
उत्तराखंड नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश में राजमार्गों और सड़कों के किनारों से सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) को क्रियान्वयन की रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर कोर्ट में पेश करने के लिए कहा है।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नैनीताल जिले के पदमपुरी और खुटानी में सड़क किनारे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर प्रभात गांधी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पत्र पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की।

विज्ञापन

पत्र में कहा गया था कि पदमपुरी और खुटानी में राजमार्ग के किनारे सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण कर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाए गए हैं। यहां तक कि मंदिर भी बनाए गए हैं। कोर्ट ने नैनीताल की डीएम वंदना समेत सभी डीएम और डीएफओ को जांच के साथ ही अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट चार सप्ताह में देने के लिए कहा। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई पांच सितंबर को होगी। 

IDPL ऋषिकेश के पूर्व कर्मचारियों के आवास ध्वस्त करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
हाईकोर्ट ने आईडीपीएल ऋषिकेश के पूर्व कर्मचारियों के आवासों को ध्वस्त करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। गुलशन भनोट व आईडीपीएल के कुछ पूर्व कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार के 19 जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आईडीपीएल के कर्मचारियों के आवासों को ध्वस्त करने की सूचना दी गई थी।

विज्ञापन

याचिका में कहा गया कि उन्हें आईडीपीएल की ओर से मकान आवंटित किए गए थे। कंपनी पर अभी भी कई कर्मचारियों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना भुगतान सहित वित्तीय देनदारी है। याचिका में कहा गया कि भले ही जमीन पर आईडीपीएल का पट्टा समाप्त हो गया हो लेकिन कंपनी के कर्मचारियों को बुलडोजर का उपयोग करके बलपूर्वक बेदखल नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार या वन विभाग, जिन्होंने ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया है, उन्होंने कानून की उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई है। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed