21 हजार उपनल कर्मियों के लिए हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एक साल में नियमित करने के दिए आदेश
हाईकोर्ट ने उपनलकर्मियों को चरणबद्ध ढंग में एक साल के भीतर नियमितीकरण नियमावली के तहत नियमित करने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि उपनलकर्मियों को न्यूनतम वेतनमान जरूर मिले और उनको छह माह के अंदर एरियर तथा महंगाई भत्ता भी दिया जाए। कोर्ट ने सरकार को यह भी आदेश दिया है कि वह उपनलकर्मियों के एरियर से जीएसटी या सर्विस टैक्स की कटौती न करे। प्रदेश के विभिन्न विभागों में 21 हजार से अधिक उपनलकर्मी तैनात हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की। पूर्व में हाईकोर्ट ने कुंदन सिंह नेगी की ओर से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। पत्र में उपनल की ओर से की जा रही नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
कहा गया था कि उपनल का संविदा लेबर एक्ट में पंजीकरण नहीं है, इसलिए यह असंवैधानिक संस्था है। उपनल का गठन पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए किया गया है लेकिन राज्य सरकार ने इस संस्था को आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति का माध्यम बना दिया है। उपनल पर पूर्ण नियंत्रण राज्य सरकार का है।
याचिका में उपनलकर्मियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए नीति बनाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता एमसी पंत को इस केस की पैरवी के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया था।
21 हजार उपनलकर्मियों की उम्मीदों को पंख
पंत ने कोर्ट को बताया था कि सरकार उपनलकर्मियों को एक दिन का फिक्शनल ब्रेक साल में एक बार देती है और इससे उपनलकर्मियों की नियमित नियुक्ति नहीं हो पाती। कोर्ट ने सरकार को ऐसा कोई ब्रेक न देने को कहा था। सरकार ने कोर्ट को बताया कि उपनलकर्मियों के नियमितीकरण की नीति पर विचार किया जा रहा है।
इस मामले की सुनवाई में कोर्ट ने माना कि उपनलकर्मियों के नियमितीकरण के मामले में सरकार की ओर से रखा गया उमा देवी मामला मान्य नहीं है। उमा देवी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारें नियमितीकरण के लिए नियम बना सकती हैं। प्रदेश सरकार की ओर से उपनलकर्मियों का नियमितीकरण न करना अतार्किक है।
नैनीताल उच्च न्यायालय के फैसले से प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 21 हजार उपनलकर्मियों की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। अपने भविष्य को लेकर चिंतित उपनलकर्मी स्थाई किए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनके संघर्ष के दबाव में पूर्व सरकार ने उन्हें संविदा पर लाए जाने का फैसला किया था, लेकिन ये अदालत में नियमावली के खारिज हो जाने से लागू नहीं हो पाया।
ये है पूरी स्थिति
-प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में 21 हजार से अधिक उपनलकर्मी तैनात हैं
-स्थाई नौकरी व समान कार्य का समान वेतन की मांग को लेकर संघर्षरत हैं
-पूर्व सरकार में निर्णायक आंदोलन के दबाव में सरकार ने एक समिति बनाई थी
-समिति ने 10 साल की सेवा वाले उपनलकर्मियों को संविदा पर लाने की सिफारिश की
-वर्ष 2016 में अस्थाई कर्मियों की विनियमितीकरण नियमावली में सरकार ने संशोधन किया
-बाद में 10 साल के स्थान पर सात साल की सेवा वालों को संविदा पर लाने का प्रावधान किया
-उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर 2016 की संशोधित नियमावली को निरस्त कर दिया
-स्थाई नियुक्ति की मांग को लेकर उपनलकर्मियों का संघर्ष अब भी है जारी