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उत्तराखंड: 2011 से पहले के बीएड डिग्रीधारकों को हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत
Wed, 02 Dec 2020 11:59 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 02 Dec 2020 11:59 PM IST
सार
- कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए आवदेन के योग्य माना
- जनरल आदेश पारित कर कहा, फिर से विज्ञापन प्रकाशित करना सुनिश्चित करे विभाग
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने स्नातक में 50 फीसदी से कम अंकों से उत्तीर्ण और 2011 से पहले के बीएड डिग्रीधारकों को बड़ी राहत देते हुए ऐसे अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक प्रारंभिक शिक्षा के करीब दो हजार पदों पर आवेदन करने के लिए योग्य माना है।
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कोर्ट ने एक जनरल आदेश पारित कर शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह इस आशय का फिर से अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करना सुनिश्चित करे ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे अभ्यर्थियों को इसकी जानकारी हो सके।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। बागेश्वर निवासी पूनम पंत, अर्जुन सिंह और भुवन चंद्र सहित 50 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बीएड में 50 फीसदी अंकों की बाध्यता के नियम को चुनौती देते हुए कहा था कि शिक्षा विभाग ने 20 नवंबर, 2020 को सभी जिलों में सहायक अध्यापक के करीब दो हजार पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की है।
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इसमें आवेदन के लिए अभ्यर्थी का स्नातक में 50 फीसदी अंकों के साथ बीएड डिग्रीधारी होना अनिवार्य किया गया है और एनसीटीई की गाइडलाइंस का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा कि उन्होंने बीएड और स्नातक 2011 से पहले कर रखा है और यह उन पर लागू नहीं होता है, क्योंकि हाईकोर्ट ने पहले भी इस संबंध में आदेश जारी किए हुए हैं। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ऐसे अभ्यर्थियों को हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से सहायक अध्यापक के करीब दो हजार पदों पर आवेदन करने के लिए योग्य माना है।