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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भंग की बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, सरकार नियुक्त करेगी प्रशासक

Wed, 11 Jul 2018 06:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 11 Jul 2018 06:21 PM IST
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Uttarakhand High Court dissolve Badrinath Kedarnath Temple Committee
nainital high court - फोटो : google

नैनीताल उच्च न्यायालय ने बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग कर दिया है। डबल बेंच का फैसला पक्ष में आने के बाद धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने राहत की सांस ली है। एकल खंडपीठ में सरकार को मुंह की खानी पड़ी थी। लेकिन डबल बेंच ने उसके पक्ष में फैसला दिया है। 

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कोर्ट में सरकार की जीत से प्रसन्न महाराज ने कहा कि फैसला स्वागत योग्य है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो फैसला पक्ष में आने के बाद अब सरकार मंदिर समिति में प्रशासक तैनात कर सकती है। प्रशासक की जिम्मेदारी आयुक्त गढ़वाल, सचिव धर्मस्व या जिलाधिकारी को दी जा सकती है। पिछले वर्ष एक अप्रैल को जब प्रदेश सरकार ने समिति भंग की थी, तो तत्कालीन सचिव धर्मस्व व संस्कृति को प्रशासक बनाया गया था। लेकिन मंदिर समिति के सदस्य दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दे डाली थी।
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कोर्ट ने फैसले पर रोक लगा दी। सरकार को विशेष अपील में भी राहत नहीं मिली और उसे वहां भी झटका लगा। इसके बाद सरकार ने डबल बेंच में अपील की, जहां उसे राहत मिली है। उधर, मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही इसे सर्वोच्च अदालत में चुनौती देने के संकेत भी दिए। 
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मामला सियासत से भी जोड़ा गया
प्रदेश में भाजपा की सरकार का गठन होने के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को भंग करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले को सियासत से जोड़कर देखा गया। समिति की कमान कांग्रेस के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल के हाथों में है। माना गया कि सरकार समिति से गोदियाल को बाहर का रास्ता दिखाना चाहती है।

कोर्ट में सरकार का तर्क: कोर्ट में सरकार ने यह तर्क दिया था कि समिति की नियमावली के प्रावधान 11(2) ए में यह शक्ति निहित है कि कुशल प्रबंधन न होना महसूस करने पर सरकार, समिति को अकारण भंग कर सकती है।

सदस्यों का तर्क: सरकार ने बगैर कोई ठोस कारण बताए समिति को भंग कर दिया, जो न्यायोचित नहीं है।

हमने जिन आधार पर समिति को भंग करने का निर्णय लिया था, उसे अदालत ने सही पाया है। न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है।
- सतपाल महाराज, धर्मस्व मंत्री

मैंने पहले भी अदालत के फैसले स्वागत किया था और इस फैसले का भी स्वागत करता हूं। फैसले की प्रति मिलने पर उसका अध्ययन करूंगा और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
- शैलेंद्र गोदियाल, अध्यक्ष, बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति

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