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आईएएस स्टिंग मामले में सरकार को झटका, हाईकोर्ट ने कहा- भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए ये जरूरी

Sat, 03 Nov 2018 08:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 03 Nov 2018 08:47 AM IST
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Uttarakhand high court decision on ias sting case
nainital high court - फोटो : google

आईएएस स्टिंग केस में उत्तराखंड सरकार को बड़ा झटका लगा है। नैनीताल हाईकोर्ट ने स्टिंग प्रकरण में प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ऐसे स्टिंग की जरूरत है। राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब करने के लिए ये सही कदम है। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने इस केस में राहुल भाटिया की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी थी।

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वहीं शुक्रवार को एक अन्य फैसले में हाईकोर्ट ने जमरानी बांध को तीन साल के अंदर बनाने के आदेश भी दे दिए हैं। जमरानी बांध के संबंध में रवि शंकर जोशी की जनहित याचिका पर आज हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित करते हुए याचिका निस्तारित कर दी गई है। कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एक माह के भीतर बांध का प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजेंगे। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस प्रपोजल को छह माह के भीतर इसको स्वीकृत करेंगे।
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स्टिंग प्रकरण में पुलिस रणनीति को लगा झटका
स्टिंग प्रकरण में निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अन्य की तलाश में जुटी पुलिस को बृहस्पतिवार को करारा झटका लगा था। सीएम और अपर मुख्य सचिव के स्टिंग के प्रयास में शामिल दर्शाए गए राहुल भाटिया ने नैनीताल हाईकोर्ट से राहत पाकर पुलिस चक्रव्यूह को भेद दिया। माना जा रहा है कि अन्य आरोपी भी राहत पाने को हाईकोर्ट की शरण ले सकते हैं।
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पुलिस को चकमा देकर हाईकोर्ट से राहत पाने में कामयाब हुआ राहुल

मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव का स्टिंग करने में नाकाम रहे आयुष गौड़ को धमकाने के मामले में निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार की गिरफ्तारी का आपरेशन सफल होने के कारण पुलिस और सरकार के रणनीतिकार बेहद उत्साहित थे। पुलिस 79 दिन तक मुकदमा छिपाने के साथ उमेश की गिरफ्तारी को लेकर अपनी पीठ थपथपाने से थक नहीं रही थी। अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश चलने का दावा भी पुलिस कर रही थी।

पुलिस को स्टिंग आपरेशन की कमान संभालने वाले राहुल भाटिया से काफी कुछ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर हाईकोर्ट से राहत पाने में कामयाब हो गया। राहुल भाटिया की गिरफ्तारी पर रोक लगने से पुलिस को जोर का झटका धीरे से लगा है। अब पुलिस के सामने अन्य आरोपियों आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निलंबित कुल सचिव मृत्यंजय मिश्रा, प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी की घेराबंदी तेज करने की चुनौती बढ़ गई है। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि पुलिस अन्य आरोपियों पर कब तक और कितना शिकंजा कस पाती है।

रिमांड में लेने के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा

वहीं आईएएस स्टिंग और ब्लैकमेलिंग के आरोपी चैनल के सीईओ उमेश शर्मा को रिमांड में लेने के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। पुलिस उमेश कुमार से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लाइसेंसी असलहा बरामद करना चाहती थी, लेकिन गुरुवार को मसूरी रोड स्थित उसके घर पर पड़ताल के बाद भी कुछ नहीं मिला। 

एसओ राजपुर अरविंद कुमार ने बताया कि सात घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान उससे लगभग चार घंटे पूछताछ की गई। पहले जेल अस्पताल में मेडिकल कराया गया। इसके बाद उसे वापस जेल लेजाया गया। आरोपी की जमानत याचिका पर अब कल शुक्रवार को सुनवाई होगी। 

बता दें कि न्यायालय ने चैनल के सीईओ आरोपी उमेश शर्मा की सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक सात घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर दी थी।

पुलिस ने मांगी थी पांच दिन की कस्टडी

गौरतलब है कि 28 अक्तूबर को पुलिस ने उमेश शर्मा को गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित घर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद अगले दिन 29 अक्तूबर को एसीजेएम तृतीय रिंकी साहनी की अदालत ने उमेश को आठ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

इसके साथ ही पुलिस ने उमेश से कुछ अहम चीजें बरामद करने के लिए न्यायालय से पांच दिन की कस्टडी रिमांड मांगी थी। मंगलवार को उमेश के अधिवक्ता एमएम लांबा ने जमानत अर्जी भी दाखिल की थी। बुधवार को न्यायालय में अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों के प्रार्थनापत्रों पर बहस हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता एमएम लांबा ने पुलिस रिमांड को गैर जरूरी बताया। अपने तर्कों में बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस पहले ही सर्च वारंट लेकर उमेश के घर की तलाशी ले चुकी है।

पुलिस का तर्क था कि वह उमेश से पासवर्ड बरामद करना है। ऐसे में बचाव पक्ष ने इस पर भी तर्क दिया कि सभी इलेक्ट्रोनिक आइटमों को फोरेंसिक लैब भेजा जाना है, लिहाजा वहां की रिपोर्ट आने के बाद ही इसमें कोई निर्णय लिया जा सकता है।

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