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हाईकोर्ट ने सरकार को दिए विशेष जरूरतमंद बच्चों का लालन-पालन करने के आदेश

Wed, 11 Jul 2018 09:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Wed, 11 Jul 2018 09:41 PM IST
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uttarakhand high court decision for divyang kids
demo pic - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को दिव्यांग और विशेष जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि विशेष जरूरतमंद बच्चों का लालन-पालन किया जाए। ऐसे बच्चों को प्रतिमाह एक हजार की छात्रवृत्ति दी जाए और सभी स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति हो। साथ ही कक्षाओं, शौचालय और अन्यत्र बाधा रहित मार्ग बनाने को भी कहा।  

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न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। खंडपीठ ने कमल गुप्ता के 2014 के पत्र पर संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्रदेश के स्कूलों में दिव्यांग और विशेष जरूरतमंद वाले बच्चों के लिए शिक्षा की विशेष सुविधा नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 ए में छह साल से 14 साल के बच्चों को निशुल्क शिक्षा की बात कही गई है। पूर्व में खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। 
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खंडपीठ ने बुधवार ऐसे बच्चों के लिए स्कूल जाने के लिए यातायात की व्यवस्था करने या अभिभावकों को इसके लिए भत्ता देने, हर स्तर की शुरुआत में पुस्तकें, यूनिफॉर्म और अन्य शिक्षण सामग्री देने के भी निर्देश दिए। कोर्ट ने सरकार से कहा कि उनके लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार करवाए और तीन माह में प्रत्येक दृष्टिबाधित विद्यार्थी को लिपिकार उपलब्ध करवाए।  
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चार जिलों में एक हॉस्टल बनाएं 
कोर्ट ने एक वर्ष के भीतर चार जिलों में ऐसे विद्यार्थियों के लिए एक विशेष छात्रावास खोलने को भी कहा है। कोर्ट ने 1995 में पारित समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए एक वर्ष के भीतर अध्यापकों को प्रशिक्षित करने के भी निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि इस एक्ट में प्रावधान है कि आवश्यकतानुसार ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष विद्यालय खोले जाएं और प्रत्येक विशेष जरूरतमंद बच्चे को मुफ्त शिक्षा दिलाई जाए। कोर्ट ने कहा कि इनमें पचास फीसदी बालिकाएं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि संसद कानून बना चुकी है कि ऐसे बच्चे एक विशेष वंचित श्रेणी में माने जाएं और उन्हें बराबरी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं। 

सरकार ने भी रखा पक्ष
सरकार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2013-14 में राज्य में ऐसे 12906 और वर्ष 2014-15 में 13662 बच्चे चिह्नित किए गए थे। सरकार प्रत्येक ब्लॉक में ऐसे बच्चों के लिए सुविधायुक्त 95 कमरों का निर्माण कर रही है। 83 का निर्माण हो चुका है। उनके लिए आउटसोर्सिंग से 40 अध्यापक भी नियुक्त किए गए हैं। 


निम्न श्रेणियां निर्धारित कीं विशेष जरूरतमंद की 
कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों के लिए विभिन्न अधिनियमों का उदाहरण लेते हुए राज्य में विशेष जरूरतमंद बच्चों की 8 श्रेणियां निर्धारित की हैं। इनमें पूर्ण दृष्टिबाधित, आंशिक दृष्टिबाधित, लेप्रोसी क्योर्ड, बहरापन, लोको मोटर रोग, मानसिक रोग, मानसिक अस्वस्थता और धीमा मानसिक विकास शामिल हैं।

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