फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand high court Angry on Officers for not in Action in Slaughter house case

बूचड़खाना मामले में हाईकोर्ट ने कहा- अब क्या आदेशों का पालन कराने हमें हर विभाग में जाना पड़ेगा?

Tue, 26 Nov 2019 08:38 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 26 Nov 2019 08:38 AM IST
सार

  • आदेशों पर अमल न होने से खफा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, अधिकारी कोर्ट के आदेश को पढ़ते तक नहीं 
  • सचिव शहरी विकास, डीएम नैनीताल, पालिका ईओ और हल्द्वानी नगरायुक्त हुए अदालत में पेश
     

विज्ञापन
Uttarakhand high court Angry on Officers for not in Action in Slaughter house  case
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में बूचड़खाना मामले में आदेश का अनुपालन नहीं होने के खफा हाईकोर्ट ने अफसरों पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अधिकारी कोर्ट के आदेश का अनुपालन करना तो दूर उसे पढ़ते भी नहीं हैं। सवाल उठाया कि क्या कोर्ट अपने आदेशों के अनुपालन के लिए हर विभाग में जाएगी? 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मीट कारोबारियों की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सचिव शहरी विकास, जिलाधिकारी नैनीताल, नैनीताल नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी, हल्द्वानी नगर निगम के नगर आयुक्त व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। सचिव की ओर से कोर्ट में शपथपत्र पेश किया गया लेकिन कोर्ट उससे संतुष्ट नहीं हुई। अदालत मंगलवार को भी मामले में सुनवाई करेगी।
विज्ञापन


इस दिन संपूर्ण तथ्यों के साथ शपथपत्र कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि शपथपत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो इसे आपराधिक अवमानना मानकर उनके खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि वह 2011 में बूचड़खाना बनाने के आदेश दे चुकी है लेकिन अभी तक आदेश का पालन नहीं किया गया है, अब सरकार बूचड़खाना बनाने के लिए और समय की मांग कर रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

यह है मामला

जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया और अभी तक बूचड़खाना नहीं बनाए हैं। इस कारण उनको करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पूर्व में कोर्ट ने प्रदेश में अवैध रूप से संचालित स्लाटर हाउसों और उनमें बिक रहे मीट की जांच करने के आदेश सभी जिलाधिकारियों को दिए थे और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था। रिपोर्ट पेश नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इनको कारण बताओ नोटिस जारी कर सभी को  25 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था।

बूचड़खाना बंद तो कहां से आ रहा मीट : हाईकोर्ट
वर्ष 2011 में कोर्ट ने प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़ख़ानों को बंद कराने और मानकों के अनुरूप बूचड़खानों का निर्माण करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के विरुद्ध सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई लेकिन अभी तक सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने 2018 में भी इस संबंध में आदेश दिए तो सरकार ने 72 घंटे में सभी अवैध बूचड़खानों को बंद कर दिया परंतु अभी तक मानकों के अनुरूप कोई बूचड़खाना नहीं बनाया है।

कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब सभी बूचड़खाने बंद हैं तो प्रदेश में मांस कहां से आ रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि बरेली और नोएडा से आपूर्ति हो रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed