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उत्तराखंड में 286 ग्रामीण बैंक शाखाएं बंद

Fri, 11 Mar 2016 10:59 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Mar 2016 10:59 AM IST
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uttarakhand gramin bank 286 branch closed
उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में हड़ताल - फोटो : file photo

यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियन्स और अरेबिया के आह्वान पर गुरुवार से देशभर के 56 ग्रामीण बैंकों के साथ ही उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में भी हड़ताल शुरू हो गई।

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पहले दिन प्रदेश में ग्रामीण बैंक की 286 शाखाओं के करीब 1100 अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहे। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर धरना-प्रदर्शन किया। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की प्रदेश के 13 जिलों में स्थित सभी 286 शाखाओं, प्रधान कार्यालय व चार क्षेत्रीय कार्यालयों पर हड़ताल के प्रथम दिन पूर्ण तालाबंदी रही।
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उत्तराखंड ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन व उत्तराखंड ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के संयुक्त आह्वान पर बैंक के लगभग 1100 अधिकारी व कर्मचारियों ने हड़ताल में भाग लिया। हड़ताली कर्मचारियों ने बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर एकत्रित हो कर धरना दिया व बैंक के अधिकारी संगठन के अध्यक्ष भुवनेंद्र बिष्ट एवं कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने कहा गया कि देश की 80 प्रतिशत जनता को सेवाएं देने वाले बैंकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
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बैंकों का निजीकरण कर ग्रामीण जनता को बैंक सेवाओं से वंचित किए जाने का प्रयास सरकार का विरोध किया जाएगा। हड़ताल 11 सूत्री मांगों के समर्थन में शुक्रवार को भी जारी रहेगी। ग्रामीण बैंकों में हड़ताल की वजह से प्रदेशभर में करीब 200 करोड़ रुपये का काम प्रभावित हुआ। इस वजह से चेक क्लीयरेंस सहित सभी काम अटके रहे।

इस मौके पर क्षेत्रीय समिति देहरादून के अध्यक्ष केएम शर्मा, सचिव अजय शर्मा, बीएल आर्य, कुलवंत रावत, सुरेंद्र रावत, राकेश पंवार, जयप्रकाश, जीडी सिंह, संदीप वर्मा, सचिन जैन, भगत तड़ियाल, प्रदीप गुप्ता, कुलभूषण नैथानी, संजय, सोहन लाल जगदीश पंत, राजकुमार शर्मा, राजेंद्र अरोड़ा, लखपति रावत, भजन सिंह, नीलम सेठी, सविता राणा मौजूद रहे।


यह हैं मांग
- ग्रामीण जनता की सेवा में लगे ग्रामीण बैंको का निजीकरण रोका जाए। ग्रामीण बैंक अधिनियम में किए गए संशोधन वापस लिए जाएं।
- सरकारी बैंकों की तरह मृतक आश्रित योजना को ग्रामीण बैंकों में भी अन्य बैंकों में लागू होने की प्रभावी तिथि से लागू किया जाए।
-सरकारी बैंकों की तरह पेंशन योजना ग्रामीण बैंक कर्मियों के लिए भी लागू की जाए।
-ग्रामीण बैंकों में एनआईटी अवार्ड के अनुसार द्विपक्षीय समझौतों को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
-सरकारी बैंकों में वेतन समझौता लागू होने की तिथि पर ही वित्त विभाग भारत सरकार के शासनादेश को ग्रामीण बैंक कर्मियों पर भी तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
-ग्रामीण बैंकों में स्टाफ  हितों की सुरक्षा के लिए मित्रा कमेटी की सिफारिशों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
-ग्रामीण बैंकों में आउट सोर्सिंग को तुरंत बंद किया जाए।
-ग्रामीण बैंकों में दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को तुरंत स्थायी किया जाए।
-ग्रामीण बैंकों में स्नातक भत्ता सभी कार्यालय सहायकों को दिया जाए।
-ग्रामीण बैंकों में अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए एकसमान ग्रेच्युटी नियम लागू किए जाएं।
-ग्रामीण बैंक कर्मियों के सेवा विनियमावली सरकारी बैंको के समान हो और उनका भी आईबीए को उच्चस्तरीय वार्ता करने का फोरम बनाया जाए।

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