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उत्तराखंड: बस्तियां बचाने की कोशिश पर राजभवन की मुहर, विशेष प्राविधान अध्यादेश को मंजूरी

Thu, 26 Jul 2018 08:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Jul 2018 08:15 PM IST
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uttarakhand governor approved slums special provision ordinance
Governor kk paul

राज्य की अवैध मलिन बस्तियों को उजाड़ने से बचाने की सरकार की कोशिश पर राजभवन ने अपनी मुहर लगा दी है। राज्यपाल डॉ. केके पाल ने कैबिनेट से पास नगर निकायों एवं प्राधिकरणों हेतु विशेष प्राविधान-2018 अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और छह माह के भीतर सरकार को इसे विधानसभा में पास करना होगा।

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बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मलिन बस्तियों को तोड़ने से रोकने के लिए अध्यादेश का मसौदा पेश किया गया था। इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई थी। इसके बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए मसौदा राजभवन भेजा गया। बृहस्पतिवार को राज्यपाल ने इसे मंजूरी देते हुए अध्यादेश जारी कर दिया। अब राज्य के समस्त निकायों और प्राधिकरणों पर यह व्यवस्था लागू होगी।
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अध्यादेश के तहत राज्य के नगर निकायों में मलिन बस्तियों के सुधार, अनियोजित निर्माण, विनियमितीकरण, पुनर्वासन, पुनर्व्यवस्थापन तथा उससे संबंधित व्यवस्थाओं एवं अतिक्रमण निषेध नियमावली-2016 प्रचलन में रहेगी। साथ ही राज्य सरकार तीन साल के भीतर मलिन बस्तियों एवं झुग्गी झोपड़ियों के रूप में हुए अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के समाधान के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगी। 
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इस अध्यादेश में 11 मार्च 2018 कट ऑफ डेट है। यानी इसके बाद किसी प्रकार के अनधिकृत निर्माण को अध्यादेश के तहत राहत नहीं मिलेगी। वहीं सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथ, गलियों और पटरियों पर किए गए अतिक्रमण को भी कोई छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा यदि राज्य सरकार को इस अध्यादेश के तहत की गई व्यवस्था को लागू करने में दिक्कत होती है तो राजपत्र में प्रकाशित आदेश में ऐसे प्रावधान किए जा सकेंगे जो कठिनाई दूर करने में सहायक होंगे। हालांकि इसके लिए अध्यादेश लागू करने के बाद अधिकतम दो साल का ही वक्त सरकार के पास है।

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