उत्तराखंड: अधर में लटके सोलर प्लांट लगाने के लिए और समय देगी सरकार, टैरिफ नहीं होगा कम
- उरेडा ने विद्युत नियामक आयोग को भेजा प्रस्ताव
- लॉकडाउन के कारण अधर लटक गए पहाड़ में 203 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट
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कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण अधर में लटके सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रदेश सरकार और समय देगी। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश पर प्रदेश सरकार ने सोलर प्लांट के विकास कर्ताओं को राहत देने का फैसला किया है। समय सीमा बढ़ाने पर उनके टैरिफ में कोई कमी नहीं आएगी। इसके लिए विद्युत नियामक आयोग भी प्रस्ताव भेजा गया है।
उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) के मुख्य परियोजना अधिकारी एके त्यागी के मुताबिक, इस महीने से प्लांट लगाने की समयसीमा बढ़ा दी जाएगी। पर्वतीय क्षेत्र में पलायन को रोकने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से शुरू हुई सोलर प्लांट योजना से काफी उम्मीदें हैं। प्रदेश सरकार ने दो चरणों में 203 मेगावाट के प्रोजेक्ट लगाने की अनुमति दी थी। निविदा प्रक्रिया के तहत पहले चरण में 208 प्लांट जून 2020 तक लगाए जाने हैं। दूसरे चरण के 75 प्लांट पर अक्टूबर 2020 में काम पूरा होना है।
सूत्रों के अनुसार, सोलर प्लांट लगाने के लिए कंपनियां चीन से सामान लाती हैं, लेकिन चीन में कोरोना संकट पैदा होने से कंपनियों को झटका लगा। विकासकर्ताओं को कंपनियों से सामान नहीं मिल पाया। नतीजा यह हुआ कि वे समय पर अपना प्लांट लगाने में देरी हुई। इस बीच देश में कोविड-19 महामारी ने दस्तक दे दी। लॉकडाउन के कारण प्लांट लगाने की योजना जहां की तहां ठहर गई। इसका असर उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के स्तर पर शुरू हुई सोलर रूफ टॉप योजना पर भी पड़ा। अब इन दोनों योजनाओं के लिए समयसीमा बढ़ेगी।
विकासकर्ताओं ने आयोग का दरवाजा खटखटाया
विकासकर्ताओं ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया कि लॉकडाउन के कारण वे अपना प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं कर सकते। समय पर प्रोजेक्ट शुरू न होने से उनकी बिजली बेचने की जो दरें तय की गई हैं, वे कम हो जाएंगी। इस घाटे से बचाने के लिए उन्होंने आयोग से प्रोजेक्ट लगाए जाने की अवधि बढ़ाने और लागू टैरिफ को जारी रखने का अनुरोध किया।
विकास कर्ताओं की दिक्कतें
कइयों को भूमि का लैंड यूज चेंज कराना है। कुछ के बैंक ऋण का मामला प्रक्रिया में है। कुछ को प्लांट लगाने के लिए साइट पर जाना है, लेकिन लॉकडाउन में आवाजाही पर रोक होने के कारण संभव नहीं हो पाया। मार्च महीने में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समय खराब हुआ। उसके बाद करीब महीने से लॉकडाउन जारी है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन अवधि को ध्यान में रखकर विकासकर्ताओं को राहत दे दी जाए। आयोग को प्रस्ताव चला गया है। अभी यह पता नहीं कि लॉकडाउन कब तक रहेगा। लेकिन प्रस्ताव यही है कि विकासकर्ताओं को समय सीमा में राहत देते समय कर्मचारियों की एक महीने चली हड़ताल, लॉकडाउन की समयसीमा तथा 30 दिन अतिरिक्त शामिल करते हुए राहत दी जाएगी।
- एके त्यागी, मुख्य परियोजना अधिकारी, उरेडा