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सरकार ने वापस ली बेरीनाग-चौकोड़ी की चाय बागान की भूमि, कल हाईकोर्ट में होनी है सुनवाई

Tue, 23 Jul 2019 09:26 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 23 Jul 2019 09:26 AM IST
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Uttarakhand Government took back tea plantation  Berinag and Chakodi land
- फोटो : फाइल फोटो

बेरीनाग और चौकोड़ी में चाय बागान के उपयोग वाली करीब 1047 हेक्टेयर भूमि अब राज्य सरकार ने वापस ले ली है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके लिए आदेश भी कर दिए हैं। सरकार के मुताबिक यह भूमि चाय बागान के लिए दी गई थी, लेकिन इसका उपयोग चाय उत्पादन के लिए नहीं हुआ और इस भूमि पर अवैध कब्जे हो रहे हैं।

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इसी भूमि को लेकर हाईकोर्ट में भी वाद जारी है। हाईकोर्ट में सुनवाई से ठीक एक दिन पहले ही सरकार ने यह फैसला लिया है। पिथौरागढ़ जिले में चौकोड़ी और बेरीनाग में यह भूमि चाय बागान के लिए दी गई और इस वजह से सीलिंग एक्ट के अधीन नहीं थी।
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राजस्व ने इसे फी सिंपल इस्टेट (ऐसी भूमि जिसके स्वामी को भू उपयोग के अधिकार प्राप्त हो) माना और पाया कि चाय बागान के विकास के लिए ही यह भूमि गांव के लोगों को दी गई थी। यह भी पाया गया कि अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम (सीलिंग एक्ट) के तहत इस भूमि के लिए राज्य सरकार ने छूट भी प्रदान की थी। बेरीनाग प्रशासन ने इस मामले की जांच की तो पाया कि भूमि पर कब्जे हो रहे हैं और मकान-दुकान तक बना लिए गए।
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इसी को देखते हुए प्रशासन ने भूमि की खरीद फरोख्त पर रोक लगाई तो मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा। कोर्ट ने 27 जून 2019 को हुई सुनवाई में जिलाधिकारी पिथौरागढ़ की रिपोर्ट का संज्ञान लिया और उन्हें समुचित कार्यवाही करने और आठ सप्ताह के अंदर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। मंगलवार को इस मामले में कोर्ट में सुनवाई होनी है। जिलाधिकारी का कहना था कि यहां सीलिंग एक्ट का उल्लंघन किया गया है और इस वजह से यह भूमि राज्य सरकार में निहित होनी चाहिए। 

जांच में यह भी पाया गया कि यह भूमि जिन खातेदारों को चाय के बागान विकसित करने के लिए दी गई थी, उन्होंने चाय बागान का विकास न करके अन्य लोगों को रजिस्ट्री, दाननामा और स्टांप पेपर पर आपसी सहमति के आधार पर इकरारनामा कर जमीन बेच दी।


इसके लिए राज्य सरकार से अनुमति नहीं ली गई और भूमि खरीदने वालों ने भी मकान-दुकान आदि बनाकर अतिक्रमण कर लिया। भूमि की खरीद फरोख्त पर रोक के बाद जिला न्यायालय में दस और उच्च न्यायालय में सात मामले पहुंचे।

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