फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   uttarakhand government suffers due to state employee strike

विस चुनाव करीब आते ही कर्मचारी कर रहे उत्तराखंड सरकार को 'ब्लैकमेल'

Sun, 18 Sep 2016 02:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 18 Sep 2016 02:52 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand government suffers due to state employee strike
माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों से वार्ता करते सीएम रावत - फोटो : AmarUjala

विधानसभा चुनाव को करीब आता देख उत्तराखंड सरकार पर सियासी दबाव बनाने के लिए कई महकमों के कर्मचारी आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं।

विज्ञापन


साढ़े चार लाख के करीब सरकारी, संविदा और आउट सोर्स पर लगे कर्मचारियों के आंदोलनों को झेलना सरकार की मजबूरी बन गई है। हालांकि हर चुनाव से पहले कर्मचारी आंदोलन चरम पर होते हैं, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा चिंताजनक हैं। लगभग एक लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी इस समय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
विज्ञापन


आम आदमी रोजाना की हड़तालों से परेशान है। लेकिन ये कर्मचारी संगठन अपने भारी संख्याबल को हथियार बनाकर सरकार को बैकफुट पर लाने का दबाव बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ की कई मांगों पर सरकार सहमति जता चुकी है। लेकिन वे बिना शासनादेश मानने को तैयार नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, अब 27 हजार प्राथमिक शिक्षक भी सोमवार से बड़ा आंदोलन शुरू करने वाले हैं। अगर सितंबर माह की बात करें तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, वाणिज्य कर्मचारी, एएनएम, रोडवेज कर्मचारी, उपनल सहित तमाम संगठन इस माह आंदोलन कर चुके हैं। कुछ आश्वासनों से माने तो कुछ बड़े आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे हैं। सरकार का कर्मचारियों के प्रति नरम रवैया भी इनके मनोबल को बनाए हुए है।

20 प्रतिशत आबादी को करते हैं प्रभावित
सरकारी महकमों, निगमों, निकायों में तैनात नियमित, संविदा, आउटसोर्र्सिंग कर्मचारियों की संख्या प्रदेश की 20 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करती है। इतनी बड़ी आबादी के सरकारी कर्मचारियों से सीधा जुडे़ होने के चलते हर सरकार इनके आंदोलनों के खिलाफ कभी सख्त रुख अपनाती नहीं दिखी और इसी का फायदा कर्मचारी संगठन उठा रहे हैं।

सख्ती करने से भी बचती है सरकार

uttarakhand government suffers due to state employee strike
योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करते मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला

सरकारी कर्मचारी संगठनों के आंदोलनों पर सरकारी हमेशा सख्ती करने से बचती है। कई संगठन हफ्तों महीने लंबे आंदोलन चलाकर ड्यूटी से गैरहाजिर रहते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। कोर्ट के आदेश के बाद खानापूर्ति के लिए नो वर्क नो पे और एस्मा तक लगाया जाता है, लेकिन हड़ताल की अवधि के दौरान अब तक किसी संगठन के सदस्यों का वेतन नहीं काटा गया।

आंदोलन पर हैं ये संगठन
- राजकीय शिक्षक संघ
- जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
- प्राथमिक शिक्षक संघ
- मानदेय प्राप्त शिक्षक
- उत्तराखंड शिक्षणेत्तर कर्मचारी
- उत्तराखंड आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ
- प्रयोगशाला एवं कार्यालय सहायक संगठन
- वाणिज्य कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन
- एससी, एसटी बैकलॉग संघर्ष समिति
- कई बेरोजगार संगठन

चुनाव नजदीक आते देख शिक्षक और अन्य संगठन सब आंदोलन में कूद गए हैं। शिक्षकों को प्रदेश की कुछ कठिनाइयों को समझते हुए हड़ताल से तत्काल वापस आना चाहिए। मैं उनके लिए जो कर सकता हूं, करने को तैयार हूं। कोई आंदोलन करता रहे, लेकिन मैं ऐसा कोई निर्णय नहीं लूंगा, जो प्रदेश हित के खिलाफ हो।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री 

हड़ताल को सरकार ने ही किया मजबूर
राजकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि उन्हें सरकार ने ही हड़ताल के लिए मजबूर किया गया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा कि सरकार उनकी मांगें मान लें तो वे अवकाश वाले दिन भी बच्चों को पढ़ाकर हड़ताल से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति को तैयार हैं। उधर, शिक्षा महानिदेशक रंजना ने कहा है कि शिक्षकों की कुछ मांगों पर अमल किया जा चुका है। उनकी कुछ मांगे वित्त से जुड़ी हैं। यदि अब वे हड़ताल से नहीं लौटे तो नो वर्क नो पे के तहत कार्रवाई होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed