यहां अनाथों की नाथ बनेगी सरकार, कैसे जानने के लिए क्लिक करें...
उत्तराखंड के बाल सुधार गृहों में रहने वाले अनाथ बच्चों के बालिग होने पर राज्य सरकार उनकी रहनुमा बनने जा रही है। सरकार ऐसे युवकों का भविष्य संवारेगी। राज्य का बाल विकास विभाग उनको स्वावलंबी बनाने की कवायद में जुटा है। इसके लिए बाल विकास मंत्री राज्यमंत्री रेखा आर्य अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही हैं।
गौरतलब है कि बालगृहों में 18 साल पूरी होने के बाद युवकों को न बाल सुधार गृहों में रखा जा सकता है और न ही उनके भविष्य के लिए कोई योजना है। इससे ऐसे युवाओं को कोई दिशा नहीं मिल पा रही है।
कोई काम न आने के कारण इनमें से कुछ तो गलत रास्ते पर पड़ जाते हैं। जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। साथ ही समाज भी उनको नहीं स्वीकार पाता है। ऐसे में अब महिला एवं बाल विकास विभाग उनका भविष्य संवारने के लिए योजना बना रहा है।
देश के विकास में भागीदार बनेंगे भागीदार
रेखा आर्य का कहना है कि नियमानुसार बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों को 18 साल पूरी करने के बाद नहीं रखा जा सकता। अब ऐसी व्यवस्था की जाएगी, जिसमें ऐसे बच्चों का घर सदन ही माना जाए और अधीक्षिका और जिलाधिकारी को उनका परिजन माना जाए, ताकि यदि वो किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करें तो उनकी अपनी पहचान हो।
बताया कि सरकार ऐसे युवाओं को प्रशिक्षित कर देश के विकास में भागीदार बनाएगी। साथ ही आफ्टर होम पीआरडी, उपनल से मार्गदर्शन दिलाया जाएगा। जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकेगा।
बता दें प्रदेश में 46 बाल सुधार गृह हैं। जिसमें सात बाल सुधार गृह स्वयंसेवी संस्थाएं संचालित करती हैं। बाकी का संचालन बाल विकास विभाग करता है। यदि कैबिनेट में यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो इससे काफी बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। वर्तमान में प्रदेशभर में ऐसे 15 अनाथ बच्चे हैं जो 18 साल की आयु पूरी कर चुके हैं।