उत्तराखंड का खजाना खाली, इस बार लेट मिलेगी पगार
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पहली तारीख पर वेतन लेने के आदी हो चुके प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को अप्रैल महीने में थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। उनकी अप्रैल की पगार लेट हो सकती है। ऐसा खराब माली हालत के चलते होने की आशंका है।
दरअसल, राज्य के खजाने की जैसी हालत है, उसके हिसाब से कर्मचारियों की पगार केंद्र से मिलने वाले पैसे पर निर्भर करेगी। केंद्रीय योजनाओं की अवशेष राशि यदि कोषागारों में समय पर नहीं पहुंची तो कर्मचारियों की पगार सात से आठ अप्रैल तक लटक सकती है।
बता दें कि प्रदेश के वित्तीय हालात ठीक नहीं है। सातवां वेतन लागू करने के बाद खजाने पर खर्च का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। बढ़े हुए खर्च की पूर्ति के लिए सरकार को पैसे का इंतजाम करना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष के दौरान कई मदों में उसे अनुमान के हिसाब से आमदनी नहीं हो पाई है। नतीजा यह है कि उसे अपने खर्चों पर काबू करना पड़ रहा है।
सभी विभागों को लंबित बिल भेजने के आदेश दिए गए
हालांकि जरूरत पूरा करने के लिए चली-चला की बेला में रावत सरकार ने आरबीआई से 750 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं है। अब सत्ताशीन नई भाजपा सरकार को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले केंद्रीय मदों में पैसा आने की आस है। इसी हिसाब से उसने वित्तीय प्रबंधन की योजना बनाई है।
मार्च माह के शुरुआत में ही सरकार की ओर से सभी विभागों को 24 मार्च तक लंबित बिल भेजने के आदेश दे दिए गए थे। इस अवधि तक विभागों ने लंबित भुगतान के बिल भेंजे। लेकिन उन्हें बिलों के एवज में पेमेंट नहीं हो रही है। शासन ने 20 लाख रुपये से ऊपर के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी है। कई विभागों के इससे कम राशि के बिलों का भुगतान भी रोकने की सूचना है।
सूत्रों की मानें तो बिलों के सापेक्ष कोषागारों में पैसा नहीं है। उसे केंद्रीय योजना मदों में मिलने वाली राशि का इंतजार है। जैसे-जैसे ये राशि पहुंचेगी, वैसे-वैसे विभागों के लंबित बिलों का भुगतान होगा। इस कारण कर्मचारियों को अप्रैल महीने की पगार में देरी हो सकती है।
वित्तीय वर्ष के आखिरी हफ्ते में ट्रेजरी मैनेजमेंट करना होता है। लिक्विडिटी के हिसाब से बिलों के भुगतान डे-टू-डे के हिसाब करने होते हैं। सेंटर से योजनाओं की लंबित राशि जैसे-जैसे प्राप्त होती है, उसी आधार पर पेमेंट होती है। 20 लाख रुपये से नीचे के बिलों के भुगतान पर रोक नहीं है। मार्च महीने की व्यस्तता की वजह से अप्रैल माह के वेतन में थोड़ा देरी हो ही जाती है।
- अमित सिंह नेगी, सचिव वित्त
खनन पर रही रोक तो घटाना पड़ेगा बजट
प्रदेश में खनन पर न्यायालय की रोक से प्रदेश सरकार की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। अदालत ने अगले चार महीने तक प्रदेश में हर तरह के खनन पर पाबंदी लगाई है। यही वह अवधि है जिसमें सरकार को खनन से ठीक ठाक आमदनी होती है। रोक लगने से सरकार इस कमाई से महरूम हो सकती है।
उसे करीब 150 करोड़ रुपये के नुकसान का झटका लग सकता है। ऐसा हुआ तो सरकार को लेखानुदान की राशि में कटौती करनी पड़ सकती है।
यदि रोक लंबी अवधि तक रही तो उसे अपना बजट भी तय अनुमान से कम करना पड़ सकता है। यही वजह है कि न्यायालय का फैसला आने के बाद सरकार गहन सोच में पड़ गई है। उसे आय के एक बड़े रिसोर्स के हाथों से निकल जाने का भय सताने लगा है। सरकार इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
खराब माली हालत को लेकर चिंतित नई सरकार
बता दें कि नई सरकार पहले दिन से ही राज्य की खराब माली हालत को लेकर चिंतित है। वह सरकार की आमदनी और खर्च के अंतर को कम करना चाहती है।
आय के जिन जरियों पर वह फोकस कर रही है, उनमें बिक्री कर और आबकारी के बाद खनन एक बड़ा रिसोर्स है। बकौल वित्त मंत्री प्रकाश पंत ‘प्रदेश में चल रहे वैध और अवैध खनन का जो कारोबार है, सरकारी खजाने में उसका महज 30 फीसदी ही आ रहा है। सरकार ऐसा फुलप्रूफ प्लान तैयार करने की योजना है कि खनन की कमाई का बड़ा हिस्सा सरकार को प्राप्त हो।’
उनकी मानें तो अदालत के फैसले से सरकार को आय के विकल्प पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जारी वित्तीय वर्ष के दौरान खनन से प्रदेश सरकार को 350 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है। नए वित्तीय वर्ष में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 500 से 600 करोड़ रुपये किया गया है। इसी अनुमान के आधार पर उसने लेखानुदान का आकार तय किया है। खनन से आय न होने पर उसे लेखानुदान में कटौती करनी पड़ेगी। सरकार को एक भय यह भी है कि यदि कोर्ट ने खनन पर लंबी अवधि की रोक लगा दी तो उसे बजट के आकार में कमी लानी पड़ेगी।
खनन राज्य की आय का एक मुख्य रिसोर्स है। इस पर रोक लगने से राज्य के राजस्व पर निश्चि तौर पर असर पड़ेगा। सरकार न्यायालय की भावना का पूरा सम्मान करती है। निर्णय के संबंध में न्यायालय से अपील की जाएगी।
- प्रकाश पंत, वित्त मंत्री