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बाढ़ मैदान परिक्षेत्र प्लान पर उत्तराखंड सरकार सुस्त
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:35 PM IST
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disaster in uttarakhand
- फोटो : अमरउजाला
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उत्तराखंड में वर्ष 2010 से नदियों से प्रलय का सिलसिला वर्ष 2013 में महाप्रलय में तब्दील हुआ, लेकिन अभी तक सरकार ने उससे सबक नहीं लिया।
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मानसून के दौरान नदियों से होने वाली तबाही से बचने के लिए उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्र का प्लान तय नहीं हुआ। हर वर्ष मानसून में नदियों के किनारे तबाही मचती है तब सरकार चेतती है। अधिनियम से बाढ़ के चलते नदियों से कितनी दूर तक किनारे सुरक्षित हैं और कौन से क्षेत्र किसी भी गतिविधि के लिए प्रतिबंधित हैं।
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किन हिस्सों में किस तरह का निर्माण हो सकता है। चार वर्ष से इसका खाका तैयार करने की कवायद है, लेकिन बाढ़ मैदान परिक्षेत्र अधिनियम 2012 पर सरकार की सुस्ती का आलम यह है कि अब पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत ही हो पाई है।
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सिंचाई विभाग के अधीन उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्र अधिनियम के तहत प्रदेश की सभी नदियों में बाढ़ नियंत्रण को लेकर प्लान तैयार होना है। राजस्व रिकार्ड में नदियों, गाड-गदेरों का दर्ज रकबा उनके प्रवाह के क्षेत्र और संभावित रूट चिह्नित किए जाने हैं।
नदियों के डेंजर जोन तलाशने के साथ वहां बाढ़ सुरक्षा कार्य करवाने का खाका तैयार होगा। नदियों से कितनी दूरी तक भवन निर्माण का कार्य प्रतिबंधित होगा और कितनी दूरी के बाद निर्माण किया जा सकता है इसका चिह्नीकरण कर अधिसूचित किया जाना है।
पुरानी बसाबट का होगा पुनर्वास
एक्ट के तहत नदियों में बाढ़ जोनिंग क्षेत्र अधिसूचित होने के बाद वहां पहले से बसी आबादी का पुनर्वास भी किया जाना है। प्रदेश के सभी पर्वतीय जनपदों में नदियों के किनारे आवासीय और व्यवसायिक भवनों का अनियंत्रित तरीके से निर्माण हो रखा है। जून 2013 की आपदा के बाद सरकार ने ऐसे क्षेत्रों को खाली करवाने के लिए तमाम घोषणा की, लेकिन अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ।
अब एनआईएच को दिया है जिम्मा
सिंचाई सचिव आनंद बर्धन ने बताया कि अधिनियम के तहत बाढ़ मैदान परिक्षेत्र के लिए आठ माह पूर्व कार्य शुरू किया गया। हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सिंचाई विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोग्राफी जोनिंग का जिम्मा दिया है। एनआईएच ने अभी जनपदों की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है, जिसके बाद ही अगली कार्यवाही होगी। जनपदों में डीएम के अधीन समितियां बनाई गई हैं।
एसडीएमए पर भी सरकार सुस्त
जून 2013 की आपदा के बाद सरकार ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन तो किया, लेकिन उसने काम करना शुरू नहीं किया। प्रदेश में आपदा प्रबंध के मजबूत दावे करने वाली सरकार ने एक माह पहले कैबिनेट ने प्राधिकरण का ढांचा पारित किया है। अब प्राधिकरण में नियुक्तियां हो पाएंगी जिसके बाद अगले मानसून तक प्राधिकरण काम करने में समर्थ हो पाएगा।
Published By : Nirmala Suyal