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आपदा की 'गोद' में उत्तराखंड, बेफिक्र सरकार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 08 Jan 2014 09:53 AM IST
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16-17 जून को आई केदारनाथ आपदा का कारण बने 1600 भूस्खनल क्षेत्र ऐसे थे जिनके बारे में बता दिया गया था कि यह अति संवेदनशील क्षेत्र में हैं और कभी भी भरभरा कर गिर सकते हैं।
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दूसरी तरफ उत्तराखंड सरकार केदारनाथ आपदा के बाद भी यह तय नहीं कर पाई है कि अति संवेदनशील क्षेत्र कौन-कौन से हैं और इन क्षेत्रों में नुकसान को कम करने के लिए क्या किया जाएगा।
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इसरों ने तैयार किया था मैप
यह काम इसरो ने किया था और इसके लिए बाकायदा अति संवेदनशील क्षेत्रों का मैप तैयार किया था। हद यह है कि केदारनाथ की आपदा के बाद यह तो माना जा रहा है कि इसरो की इस कसरत से नुकसान खासा कम किया जा सकता था पर इस मैप को योजना का हिस्सा बनाने की कोशिश न के बराबर है।
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इसरों ने वर्ष 2000 में उत्तराखंड और हिमाचल के करीब 2000 किलोमीटर के यात्रा रूट का मैप तैयार किया था। इस मैप में यह साफ-साफ दर्शाया गया था कि यात्रा रूट पर कौन-कौन से अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में पहाड़ कैसे हैं।
नदी से कटाव या भारी बरसात होने पर कहां-कहां भूस्खलन हो सकता है। सेटेलाइट डाटा का उपयोग कर पहाड़ का ढाल, भू उपयोग आदि को भी विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही इसका फील्ड सर्वे भी इसरों ने कराया था।
केदारनाथ आपदा में 2000 जगह पर भूस्खलन हुआ
खास बात यह भी रही कि वर्ष 2000 के बाद की प्रदेश में आई आपदा से यह भी जाहिर हुआ कि ये मैप सटीक हैं। मसलन केदारनाथ आपदा के दौरान ही करीब 2000 जगह पर भूस्खलन हुआ।
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इनमें से करीब 1600 स्थान वे हैं जिनके बारे में मैप में बहुत हद तक स्पष्ट कर दिया गया था कि यह अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। हद तो यह है कि केदारनाथ की आपदा के बाद भी अतिसंवेदनशील स्थानों के मानचित्रों को ठंडे बस्ते में ही रखा गया है।
अब केंद्रीय योजना आयोग की संस्तुति पर इस मैप को अपडेट किया जा रहा है। पर आपदा प्रबंधन में मैप के उपयोग को लेकर शायद ही कोई सुगबुगाहट हो।
यहां सटीक साबित हुआ था मैप
- फाटा भ्यूनांग भूस्खलन 2001-16 जृुलाई, 2001 को बादल फटने के कारण रुद्रप्रयाग में भूस्खलन हुआ था। मैप से जाहिर
हुआ कि यह भूस्खलन मैप में दिखाए गए अति संवेदनशील स्थान पर हुआ।
- वरुणावत्त, उत्तरकाशी-वरुणावत्त भूस्खलन 2003 में शुरू हुआ था। मैप में वरुणावत्त को अति संवदेनशील क्षेत्र में दर्शाया गया है।
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- ऊखीमठ भूस्खलन 2012-14 सितंबर, 2012 को रुद्रप्रयाग जिले में भारी बरसात के कारण करीब 475 स्थानों पर भूस्खलन हुआ। मैप से तुलना करने पर जाहिर हुआ कि अधिकतर भूस्खलन अति संवेदनशील स्थानों पर हुए।
- केदारनाथ भूस्खलन, 2013-16-17 जून को केदारनाथ घाटी में आई आपदा के कारण करीब 2000 स्थानों पर भूस्खलन हुआ। मैप से तुलना करने पर करीब 1600 स्थान ऐसे पाए गए जो मैप में अति संवेदनशील स्थान के रूप में चिंहित हैं।
योजना आयोग ने आगे बढ़ाया कदम
केंद्रीय योजना आयोग ने अब मैप को अपडेट करने और इस मैप के आधार पर अति संवेदनशील स्थानों पर पहाड़ी ढाल का स्थिरीकरण करने, वैकल्पिक मार्ग तलाश करने, सुरंगों का प्रयोग करने का सुझाव दिया है।