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केंद्र सरकार की बात नहीं मान रही उत्तराखंड सरकार

Mon, 13 Oct 2014 12:47 PM IST
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Mon, 13 Oct 2014 12:47 PM IST
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uttarakhand government against central government.

सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का अपने सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति पाने का प्रावधान है।

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सभी राज्यों के लिए पालन करना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर केंद्र सरकार द्वारा जारी शासनादेश का सभी राज्यों के लिए पालन करना अनिवार्य है, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं हो रहा।

राजस्व विभाग में संग्रह अमीन पद पर पदोन्नति पर लगाई गई रोक का शासनादेश इसकी तस्दीक करता है। मामले में संग्रह अमीन संघ ढाई माह से आंदोलनरत है, मगर सुनवाई नहीं हो रही।

राज्य में राजस्व संग्रह का कार्य करने वाले संग्रह अमीन पद पर सरकार ने फरवरी 2009 में रोक लगा दी। इसके बाद किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति नहीं दी गई। शासनादेश ने इस पद पर प्रदेशभर में कार्यरत करीब 475 कर्मचारियों की पदोन्नति के रास्ते बंद कर दिए।
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जबकि राज्यभर में संग्रह अमीन के करीब 525 पद हैं, जिनमें से 50 लंबे अरसे से रिक्त हैं। सरकार के निर्णय से इस पद पर कार्यरत व्यक्ति की योग्यता, कार्यकुशलता और प्रोत्साहन की अनदेखी तो हुई ही है, संपूर्ण सेवाकाल में किसी भी पद पर तीन बार पदोन्नति के मौलिक अधिकारियों से भी वंचित कर दिया गया है।
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वर्षवार नायब तहसीलदार सेवा नियमावली में निर्धारित कोटा

अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय (1944) से
60 प्रतिशत-सीधी भर्ती से
30 प्रतिशत-भूलेख निरीक्षकों से (कानूनगो से)
06 प्रतिशत-संग्रह अमीनों से
03 प्रतिशत-रजिस्ट्रार कानूनगो से
01 प्रतिशत- सर्वे और भूमि रिकॉर्ड संस्थान हरदोई की परीक्षा में प्रथम तीन स्थान पाने वाले व्यक्तियों में से एक राजस्व निरीक्षक

2009 के संशोधन के बाद निर्धारित कोटा
50 प्रतिशत-सीधी भर्ती से
40 प्रतिशत-राजस्व निरीक्षकों से
10 प्रतिशत-रजिस्ट्रार कानूनगो से
(इस संशोधन में संग्रह अमीनों के लिए निर्धारित 06 प्रतिशत पदोन्नति कोटे को समाप्त कर दिया गया)

2010 की सेवानियमावली संशोधन (जनवरी 2011 से वर्तमान तक लागू)
30 प्रतिशत- राजस्व निरीक्षकों से
10 प्रतिशत-रजिस्ट्रार कानूनगो
10 प्रतिशत-वन पंचायत निरीक्षक
50 प्रतिशत-सीधी भर्ती से

74 दिन से हैं आंदोलनरत
राजस्व संग्रह अमीन संघ का एक अगस्त से दून स्थित परेड ग्राउंड में धरना जारी है। नौ सितंबर से क्रमिक अनशन किया जा रहा है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदयवीर रावत, महामंत्री विरेंद्र सजवाण, वरिष्ठ सदस्य मस्तराम डोभाल ने बताया कि चार सूत्रीय मांगों पर अपर मुख्य सचिव शासन राकेश शर्मा 29 सितंबर को कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं।


इससे पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में अगस्त के दूसरे पखवाड़े में संघ की वार्ता भी हो चुकी है। मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

क्या हैं मांगें
नायब तहसीलदार पद का छह फीसदी कोटा बहाल हो, मौलिक नियुक्ति तिथि से सेवालाभ देने, ग्रेड-पे में संशोधन और स्टेशनरी भत्ता मासिक 10 रुपए को बढ़ाकर 500 रुपए किया जाए।

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