उत्तराखंड स्थापना: राज्य बनने के बाद कभी नहीं आया आर्थिक संकट, कैसा रहा 23 वर्षों का सफर, पढ़ें ये खास लेख
सेवानिवृत्त अपर आयुक्त राज्य कर विभाग पीयूष अग्रवाल बताते हैं कि राज्य बनने के बाद कभी आर्थिक संकट नहीं आया। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से अनेक विकास के कार्य किए हैं। राज्य में विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय इलाकों में सड़कें, शिक्षा, स्वस्थ, रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं।
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राज्य की स्थापना को 23 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो उत्तराखंड ने काफी अच्छी प्रगति की है। राज्य बनने से पूर्व अविभाजित उत्तर प्रदेश राज्य के इस भाग में राजस्व से होने वाली आय अत्यंत सीमित थी।
अविभाजित उत्तर प्रदेश राज्य में आय का मुख्य स्रोत व्यापार कर था। इसके अतिरिक्त आबकारी व स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन से भी राज्य की आय के अच्छे स्रोत रहे। लेकिन इन स्रोतों में व्यापार कर व स्टांप एंड रजिस्ट्रेशन से होने वाली आय पूरे प्रदेश की तुलना में अत्यंत सीमित थी।
राज्य स्थापना के वर्ष 2000-01 में व्यापार कर से प्राप्त आय लगभग 233 करोड़ थी। कर से कम आय का मुख्य कारण राज्य का अधिकांश हिस्सा पर्वतीय क्षेत्र होना रहा है। कर के रूप में आय मुख्य रूप से जनपद हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून, नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों से होती है।
राज्य बना तो सारी आशंकाएं धरी रह गईं
राज्य गठन के समय इस प्रकार की आशंका व्यक्त की जाती थी कि नवगठित राज्य उत्तराखंड को अपने व्यय को पूरा करने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। यहां तक की कर्मचारियों को समय से वेतन देना मुश्किल होगा। राज्य बना तो सारी आशंकाएं धरी रह गईं। 23 साल के सफर में कभी भी राज्य में आर्थिक संकट की स्थिति नहीं आई।
राज्य गठन के समय कुल आय के सापेक्ष वर्ष 2021-22 में कर राजस्व 14176 करोड़ व करेत्तर राजस्व 2755.96 करोड़ रहा है। राज्य के कर राजस्व प्राप्ति में जीएसटी और वैट से 8275 करोड़, राज्य उत्पाद शुल्क से 3258 करोड़, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क से 1488 करोड़ प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से अनेक विकास के कार्य किए हैं। राज्य में विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय इलाकों में सड़कें, शिक्षा, स्वस्थ, रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं।
पूरा उत्तराखंड एक बहुत बड़ा पर्यटक केंद्र
राजस्व में वृद्धि इस बात के भी संकेत हैं कि राज्य में उपभोग क्षमता में वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में व्यापार कर के स्थान पर जीएसटी प्रणाली लागू होने पर इस मद से मिलने वाले राजस्व में कमी आई। जहां वर्ष 2000-01 से 2016-17 तक व्यापार कर राजस्व की वार्षिक वृद्धि 19.75 प्रतिशत थी। जीएसटी प्रणाली लागू होने से प्रथम पांच साल केंद्र सरकार ने 14 प्रतिशत वृद्धि दर से हानि की प्रतिपूर्ति की गई। जीएसटी प्रणाली प्रावधानों के चलते इस कर के मद में बहुत अधिक वृद्धि अपेक्षित नहीं है।
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इन परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि राज्य में राजस्व के नए साधनों को चिन्हित करते हुए राजस्व में वृद्धि की जाए। राज्य में खनन, पनबिजली, अन्य प्रकार के अक्षय ऊर्जा के साधनों को आय का स्रोत बनाया जा सकता है। पूरा उत्तराखंड एक बहुत बड़ा पर्यटक केंद्र है। प्रत्येक वर्ष करोड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इन पर्यटकों से अप्रत्यक्ष रूप से राजस्व व रोजगार का सृजन होता है। लेकिन पर्यटक स्थलों को उचित प्रकार से विकसित कर प्रत्यक्ष राजस्व का सृजन भी किया जा सकता है।