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सैन्य शक्ति सम्मेलन 2019: उत्तराखंड में जान न्यौछावर करने की परंपरा का नाम है सेना 

Sun, 03 Nov 2019 01:09 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 03 Nov 2019 01:09 PM IST
सार

  • चार नवंबर को अमर उजाला और प्रदेश सरकार संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं सैन्य सम्मेलन
  • मंथन के जरिए वीर सैनिकों और वीर नारियों को नमन करने के साथ उनके सामने आ रही चुनौतियों से पार पाने की तलाशी जाएगी राह 
     

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Uttarakhand Foundation Day 2019 Sainya shakti conclave in Dehradun All details
तरूण विजय - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड वीर सैनिकों की भूमि है। प्रदेश के समृद्ध सैन्य इतिहास के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड को सैन्य धाम मानते हैं। प्रथम विश्वयुद्ध से लेकर अब तक देश की सीमाओं के सजग प्रहरियों का दायित्व अपने प्राणों की आहुति देकर भी प्रदेश के जांबाजों ने अपने सैन्य धर्म को निभाया है।

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वीरता की बानगी भी यह रही है कि युद्ध अलंकरण का शायद ही कोई पदक हो, जो प्रदेश के जांबाजों के खाते में आया हो। प्रदेश के सैन्य इतिहास का ही सबब है कि यहां सेना एक करियर नहीं बल्कि परंपरा है। यही वजह है कि जनसंख्या घनत्व के हिसाब से देश में सबसे अधिक सैनिक देने वाले प्रदेशों में उत्तराखंड शामिल है।
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राज्य स्थापना दिवस पर चार नवंबर को अमर उजाला सैन्य सम्मेलन कान्क्लेव के जरिए प्रदेश के इसी इतिहास को याद करेगा। वीर सैनिकों और वीर नारियों को नमन करेगा, उनके सुख और दुख की बात करेगा और एक मंथन के जरिए उनके सामने आ रही चुनौतियों से पार पाने की राह तलाशेगा। अमर उजाला की इस मुहिम में हमकदम प्रदेश सरकार भी है।
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पहले विश्वयुद्ध से लेकर अब तक देश की सीमा पर किसी भी तरह की तपिश को यहां के सैनिकों ने किसी न किसी रूप में अपने सीने पर सहकर यह साबित भी किया। ब्रिटिश शासनकाल में कुमाऊं और गढ़वाल रेजीमेंट स्थापित की गई थी। शायद ही कोई ऐसा पदक हो प्रदेश के वीर जांबाज सैनिकों और सैन्य अधिकारियों ने हासिल न किया हो।

कारगिल युद्ध की विजय गाथा में भी सहयोग

कारगिल युद्ध की विजय गाथा भी यहां के सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की भूमिका को रेखांकित किए बिना अधूरी ही गिनी जाएगी। कारगिल युद्ध में प्रदेश के 75 जांबाज सैनिक शहीद हुए। जनसंख्या घनत्व के हिसाब से उत्तराखंड से सर्वाधिक युवा सेना में शामिल होते हैं।

उत्तराखंड में 1.75 लाख पूर्व सैनिक और वीर नारियां हैं। उत्तराखंड सामरिक लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी साढ़े तीन सौ किलोमीटर लंबी सीमा चीन से लगती है। प्रदेश के सैन्य महत्व को देखते हुए चार धाम ऑलवेदर रोड और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जैसे अहम प्रोजेक्ट गतिमान हैं।

सैन्य सम्मेलन कॉन्क्लेव के जरिये ऐसे तमाम मुद्दों पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। चार मंथन सत्रों के माध्यम से वरिष्ठ सैन्य अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा, आधुनिकीकरण, सैन्य ट्रेनिंग और पूर्व सैनिक कल्याण जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। 
 

प्रसिद्ध सैन्य एवं सैन्य प्रशिक्षण संस्थान

भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) : देश विदेश के प्रशिक्षुओं को देहरादून स्थित इस अकादमी में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें भी उत्तराखंड के पास आउट युवाओं का दबदबा रहता है। इसके अलावा भीमताल में घोड़ाखाल में सैनिक स्कूल और देहरादून में राष्ट्रीय इंडियन मिलेट्री कालेज स्थित है। 

सैनिक कल्याण की दिशा में उठाए कदम 
- अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली राशि देश में सर्वाधिक
- सैनिकों को गृहकर और स्टांप ड्यूटी में छूट
- दिव्यांग पूर्व सैनिकों के लिए अनुदान योजना
- सैन्य और अर्द्ध सैन्य बलों में शामिल होने वाले युवाओं को अनुदान
- पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी सेवा में आरक्षण 
- उपनल के माध्यम से विभिन्न सेवाओं में नौकरी

ये हैं हमारे हीरो

- सूबेदार मेजर दरवान सिंह, विक्टोरिया क्रॉस
- आनरेरी कैप्टन गजे सिंह घले, विक्टोरिया क्रॉस 
- राइफल मैन गबर सिंह, विक्टोरिया क्रॉस (मरणोपरांत)
- लेफ्टिनेंट कर्नल डीएस थापा, परमवीर (चक्र) 
- नायक भवानी दत्त जोशी, अशोक चक्र (मरणोपरांत)
- कप्तान उमेद सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत)
- हवलदार गजेंद्र सिंह बिष्ट, अशोक चक्र (मरणोपरांत)
- हवलदार बहादुर सिंह बोहरा, अशोक चक्र (मरणोपरांत)
- नायक मोहन नाथ गोस्वामी, अशोक चक्र (मरणोपरांत)

स्वतंत्रता से पूर्व वीरता पदक
विक्टोरिया क्रास  03
मिलिट्री क्रास - 25
इंडियन आर्डर ऑफ  मेरिट - 53
इंडियन डिस्टिंग्विस्ड सर्विस मेडल - 89
मिलिट्री मेडल - 44
मैंशन इन डिस्पैच - 150

1947 से अब तक
परमवीर चक्र - 01
अशोक चक्र  - 06
महावीर चक्र - 13
कीर्ति चक्र -29
वीर चक्र 100
शौर्य चक्र 169
सेना मेडल - 745

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