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उत्तराखंड: श्रमिकों से पेड़ों का कटान कराने के बजाय ठेकेदारी पर पेड़ कटवाने की तैयारी, अफसर सहमत नहीं

Sat, 12 Sep 2026 04:29 PM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 12 Sep 2026 04:29 PM IST
सार

वन निगम में पेड़ों के कटान की मौजूदा व्यवस्था बदलने की तैयारी है। श्रमिकों के बजाय ठेकेदारों से कटान कराने की योजना पर कुमाऊं जीएम ने व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं।

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Uttarakhand Forest Corporation Plans Contract-Based Tree Felling Officials Raise Concerns read All Updates in
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

वन निगम के श्रमिकों से पेड़ों का कटान कराने के बजाय इसे ठेकेदारी व्यवस्था से कराने की योजना है, पर निगम के अधिकारी सहमत नहीं हैं। महाप्रबंधक कुमाऊं ने इस संबंध में वन निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर नई व्यवस्था से उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख किया है।

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वन महकमा रोटेशन के आधार पर काटे जाने वाले पेड़ों को चिन्हित कर आवंटित लॉट वन निगम को सौंपता है। निगम अपने श्रमिकों से पेड़ों का कटान कराता है, जबकि कटे वृक्षों को डिपो तक पहुंचाने का काम निजी क्षेत्र से कराया जाता है। अब इस व्यवस्था में बदलाव की योजना है।

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20 जुलाई को प्रबंध निदेशक ने महाप्रबंधक गढ़वाल, कुमाऊं और आरएम टिहरी, कुमाऊं और पश्चिमी को पत्र भेजकर निर्देश दिए कि कटान और विदोहन का कार्य जुलाई-2025 की संशोधित दरों से कराया जाए। आवंटित वृक्षों के विदोहन और ढुलान का काम पारदर्शी निविदा प्रक्रिया से कराने को कहा गया।

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अनियमितता की आशंका

महाप्रबंधक कुमाऊं के पत्र में वर्ष-2006 के महाप्रबंधक के आदेश का उल्लेख किया गया है। इसमें वृक्षों का पातन, कटान और चिरान विभागीय रूप से तथा प्रकाष्ठ ढुलान श्रमिकों के व्यवस्थापकों के माध्यम से कराया जाना था। पत्र में आरएम रामनगर व कुमाऊं के पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आरक्षित वन क्षेत्र में कटान, मुछान, आफ रोड ढुलान और लौपिंग का काम निविदा से कराने पर फील्ड कार्यों पर निगम का नियंत्रण कम हो सकता है। निविदादाता अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार काम कर सकते हैं, जिससे वन क्षेत्र में अनियमितता की आशंका रहेगी। बाहरी ठेकेदार को कटान देने पर वास्तविक वृक्षों की पहचान, निर्धारित वृक्षों के कटान, अनाधिकृत कटान रोकने और मौके पर जवाबदेही तय करने में भी कठिनाई हो सकती है। किसी शिकायत या अवैध कटान की स्थिति में जवाबदेही निगम की प्रभावित होने की संभावना रहेगी।

व्यवस्था की समीक्षा का सुझाव

पत्र में कहा गया है कि बाहरी व्यक्ति को काम देने से निगम की तकनीकी दक्षता और फील्ड नियंत्रण धीरे-धीरे सीमित हो सकता है। इसलिए विदोहन और पातन का कार्य निगम के माध्यम से कराया जाना उचित होगा। अंतिम निर्णय से पहले विधिक और तकनीकी परीक्षण समिति गठित कर प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा करने का सुझाव दिया गया है।

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कई बार गड़बड़ी की शिकायत आती है। पारदर्शी व्यवस्था के तहत यह निर्णय लिया गया है। इस माध्यम से गढ़वाल में कार्य होता भी है। जीएम कुमाऊं ने व्यवस्था में शिथिलीकरण की बात कही है, उनके प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। जहां निविदा के माध्यम से कार्य करने में दिक्कत हो रही है, वहां पर विचार किया जाएगा। -नीना ग्रेवाल, प्रबंध निदेशक वन विकास निगम

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