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इंटरव्यू: हरीश रावत बोले- मैं घर बैठा था, उन्होंने ललकारा मैं आ गया, बस भाजपा के लगाए कलंक से मुक्त हो जाऊं

Mon, 28 Sep 2026 05:00 AM IST
Alka Tyagi अनूप वाजपेयी
अनूप वाजपेयी Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 28 Sep 2026 05:00 AM IST
सार

उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने राजनीतिक भविष्य, राजनीतिक विरासत और चुनाव से पहले लग रहे आरोपों पर डिजिटल के कार्यक्रम शतरंज  में अमर उजाला के संपादक से बातचीत की। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...

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Uttarakhand Former CM Harish Rawat Exclusive Interview after Political Upheaval
पूर्व सीएम हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों राजनीतिक उलझन में हैं। कुछ माह पूर्व खुद को चुनावी राजनीतिक से अलग बताने वाले रावत का दिल है कि मानता नहीं। अब हरिद्वार से चुनाव मैदान में उतरने की हसरत पाल ली है। रावत का कहना है कि पीएस जीना को लेकर उन पर अनावश्यक रूप से आरोप लगाए जा रहे हैं उस पर मैं सुरक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक ढंग से अपनी लड़ाई खुद लडूंगा।

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सवाल-अब हरीश रावत क्या साबित करना चाहते हैं?
जवाब- मैं सिपाही की तरह से पार्टी और उत्तराखंड के लिए काम करूंगा। मेरा अपना मानना है कि जिस सोच-समझ का उत्तराखंड बनना चाहिए था, नहीं बना। हम उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों की कॉपीबुक यानी नकल हो गए। मैंने थोड़ा सा लकीर बदलने की कोशिश की थी। मुझे वो वक्त नहीं मिल पाया, इसके बाद जब मैं लीक से हटकर उत्तराखंड की अलग लीक बनाने की कोशिश कर रहा था तो राष्ट्रपति शासन लग गया। उन्होंने बजट गड़बड़ा दिया। उससे बहुत सारे हमारे रास्ते गड़बड़ा गए। कुछ चीजें आगे बढ़ गईं, कुछ आगे बढ़ रही हैं। बहुत सारी योजनाएं, कार्यक्रम, मुद्दे आधे-अधूरे रह गए। नई सरकार ने उन पर अपनी मुहर लगाने से इन्कार कर दिया।
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सवाल- आपके पीएस को लेकर घटनाक्रम हुआ। आपसे से जुड़ा एक व्यक्ति था। खुद को किस दिशा में देखते हैं?
जवाब-  मैं अभी भी उसी दिशा में खड़ा हूं। राज्य में कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है। बहुत बड़ा मुद्दा है। भाजपा ने उसको ब्लंट करने के लिए मेरे तत्कालीन पीएस के घर में ईडी भेज दी। जिस पीएमएलए का उपयोग किया गया, वह बड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ होती है। वह राजनीतिक उपयोग करना चाहते थे। ये मैसेज देने के लिए भाजपा ने मेरे साथ उसे जोड़ना शुरू किया। चंदन सिंह जीना अपना मामला देख लेंगे। जो भी कानूनी प्रक्रिया है, वह उस से गुजरेंगेलेकिन उसमें हरीश रावत को लाने की क्या जरूरत है। भाजपा ने मुझ पर अटैक करना शुरू कर दिया। मेरी 60 साल की राजनीतिक यात्रा का यह महत्वपूर्ण बिंदु है कि मैं इस आरोप के साथ मरूं या इससे मुक्त होकर मरूं। ये करने की कोशिश की गई है कि हरीश रावत के वक्त में नौकरियां बिकीं हैं।
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सवाल- आपकी पार्टी के तमाम लोग गए, क्या आपको कभी ऐसा प्रलोभन, मौका आया कि आप जॉइन कर लीजिए?
जवाब- देखिए, मेरे विषय में सबको मालूम है कि दो चीज नहीं कर सकता, कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकता। मैं साफ कह रहा हूं कि जूता
मारेंगे, थूकेंगे, तब भी ..हां इसके बाद मां की भी गाली देंगे मुझे अपमान महसूस होगा तो हो सकता है कि प्रारब्ध में कुछ लिखा हो। वरना हम तो यही कामना करते हैं कि जो हमने 60 साल पहले कांग्रेस का झंडा थामा था, उसी झंडे से लिपटकर जाना चाहेंगे। हम चाहते हैं कि 10-5 साल जो भगवान हमें बोनस का समय देगा, उसमें हम कांग्रेस का झंडा थामकर चल लें। ये जो राजनीतिक  चिकोटीबाज हैं, उन्हें मैं वर्षों से झेलता आया हूं। मेरी जांघों में बहुत ताकत है। मैं ऐसे चिकोटियों का मुकाबला करना जानता हूं। कभी-कभी दोनोंm लातें चलती हैं। दाईं भी, बाईं भी, इलाज समय कर देगा।

सवाल- आपको नहीं लगता कि कहीं न कहीं इस लड़ाई में आप अकेले से पड़ गए हैं?
जवाब-  पार्टी का कोई नेता आपको सपोर्ट नहीं कर रहा है?मेरे साथ मेरा विवेक है, मेरा ईमान है। मेरी मां है। मेरे साथ उत्तराखंड के लोग हैं। मैं तो बीमार था। डॉक्टर ने मुझे एडवाइज किया है कि आप छह सीढ़ी से ज्यादा नहीं चढ़ेंगे। ऐसी स्थिति में छह सीढ़ी तो छोड़ो मैं दौड़ रहा हूं। मेरे लिए जीवन महत्वपूर्ण नहीं है। मेरे लिए महत्वपूर्ण ये है कि जिस कलंक को भाजपा ने मुझ पर लगाने का प्रयास किया है, उस कलंक से मुक्त हो जाऊं। 42 हजार से ज्यादा लोगों को हमने नियुक्तियां दीं। एक दिखाओ कि कोई

बता दें कि हमारे पास कोई आया होगा तो हमारी ही चाय पीकर गया है। नौकरियों के मामले में हमने फैसला लिया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग हमने बनाया। राज्य लोक सेवा आयोग के एग्जाम नहीं हुए थे। हमने भर्ती बोर्ड बनाए। सबको स्पष्ट निर्देश थे कि कोई हस्तक्षेप न करे। उन दिनों भर्ती बोर्ड, नौकरियों को लेकर बहुत से मामले सामने आ रहे थे, मैं नहीं चाहता था कि कोई कलंक हमारे उत्तराखंड पर लगे।

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