उत्तराखंडः वन विभाग के कार्यक्रम में वन मंत्री गए नहीं, मुख्यमंत्री बुलाकर भी आए नहीं
- वन प्रमुख से दूरी की एक और वजह आई सामने
- हरक बोले, दो साल बाद हो रहा था उद्घाटन
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वन विभाग के कार्यक्रम में न बुलाए जाने के विवाद में फंसे वन मंत्री हरक सिंह और वन प्रमुख के बीच दूरी का एक और मामला सामने आया है। इसका खुलासा खुद हरक सिंह ने किया और कहा कि मामला उनका नहीं बल्कि प्रदेश के वन मंत्री का है। वन मंत्री के लिए प्रोटोकॉल का पालन तो करना ही पड़ेगा।
ताजा मामला स्थापना दिवस पर वन मुख्यालय में मंथन सभागार के उद्घाटन से संबंधित है। वन विभाग ने इस सभागार का जीर्णोद्धार दो साल पहले कराया था। तय हुआ कि इस सभागार का स्थापना दिवस पर उद्घाटन किया जाए। बात वन मंत्री हरक सिंह तक पहुंची तो उन्होंने दो साल बाद उद्घाटन को सही न बताते हुए कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया।
वन मंत्री के मुताबिक इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को समारोह के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद वन विभाग के अधिकारी मन मसोस कर रह गए।
निमंत्रण पत्रों में हरक सिंह का कहीं नाम ही नहीं था
कुछ दिन पहले ही वन विभाग ने राजपुर नेचुरल फेस्ट का आयोजन किया था। इस आयोजन के लिए बांटे गए निमंत्रण पत्रों में हरक सिंह का कहीं नाम ही नहीं था। इस समारोह में मुख्यमंत्री को बुलाया गया, लेकिन समारोह में ही वन मंत्री को निमंत्रित न करने का मामला उठ गया था। उस समय वन प्रमुख जयराज ने कहा था कि यह आयोजन एक निजी संस्था की ओर से किया गया था।
मंगलवार को हरक सिंह ने अपने आवास पर लोगों से मुलाकात की तो पूछे गए सवाल के जवाब में यह ताजा किस्सा भी सामने रख दिया। हरक ने कहा कि मंत्री के प्रोटोकॉल का पालन तो वन विभाग को करना ही होगा। कहा कि हरक एक गरीब व्यक्ति से मिलने के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करता, लेकिन बड़े कार्यक्रमों में बिन बुलाए नहीं जाता। कारण मामला हरक सिंह का नहीं वन मंत्री का है।