उत्तराखंड: वन मंत्री हरक सिंह बोले, पाखरों की टाइगर सफारी से कंडी मार्ग पर कोई फर्क नहीं
- टाइगर सफारी से कंडी मार्ग के प्रभावित होने की जताई गई थी आशंका
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उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि पाखरो की टाइगर सफारी का कांडी सड़क निर्माण पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दोनों अलग-अलग परियोजनाएं हैं। सोमवार को विधानसभा में मीडिया से मुखातिब हरक सिंह ने कहा कि टाइगर सफारी की योजना करीब 150 करोड़ की है।
देश में यह पहली टाइगर सफारी है, जो किसी रिजर्व पार्क में बनाई जा रही है। कार्बेट की इस टाइगर सफारी की घोषणा पीएम मोदी ने 2018 में खुद की थी। हरक ने कहा कि टाइगर सफारी को लेकर विवाद पैदा किया जा रहा है, जो सही नहीं है।
हरक ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र से ही एक विधायक ने कहा कि टाइगर सफारी से कंडी मार्ग पर फर्क पड़ेेगा। टाइगर सफारी के पहले चरण का काम भी शुरू हो गया है। हरक के मुताबिक टाइगर सफारी बनने से राज्य को फायदा ही होगा। टाइगर सफारी एक तरह से व्यावसायिक गतिविधि है। रिजर्व वन में यह बन रही है तो कहा जा सकता है कि वन क्षेत्र के बाहर कंडी रोड के लिए भी अनुमति मांगी जा सकती है।
क्या है मसला
वन मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र कोटद्वार से ही टाइगर सफारी को लेकर विरोध के स्वर उठे। लैंसडौन के भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत ने वन मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए। दिलीप का कहना था कि टाइगर सफारी से कंडी मार्ग पर सवाल उठेंगे और यह मार्ग नहीं बन पाएगा।
रिजर्व फॉरेस्ट से होकर जाने वाली कंडी सड़क दरअसल वन मार्ग है और कोटद्वार व कुमाऊं को जोड़ने के लिए इस सड़क के निर्माण की बात की जा रही है। यह सड़क भी हरक सिंह की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।