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Uttarakhand: रिकॉर्ड तोड़ जंगलों में आग की घटनाएं दर्ज, वायु गुणवत्ता चिंताजनक, ब्लैक कार्बन बढ़ा रही तपन
Wed, 29 Apr 2026 08:23 AM IST
Renu Saklani
मुकेश चंद्र आर्य, संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी।
मुकेश चंद्र आर्य, संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी।
Published by: Renu Saklani
Updated Wed, 29 Apr 2026 08:23 AM IST
सार
वनाग्नि की घटनाओं में 96.08 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बेशकीमती जंगल जल चुके हैं। वनाग्नि से वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्लैक कार्बन भी तपन बढ़ा रही है।
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जंगल में लगी आग (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों में इस साल अप्रैल महीने के तीसरे हफ्ते में ही रिकॉर्ड तोड़ वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं। बीते साल के मुकाबले अभी तक करीब 42 फीसदी अधिक जंगल जल चुके हैं। जिससे पहाड़ों के स्वच्छ पर्यावरण में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों ने इससे गंभीर खतरे की आशंका जताई है।
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वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक वनाग्नि की 145 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। जिसमें 81 घटनाएं आरक्षित जंगलों और 64 सिविल वनों में दर्ज की गईं। इससे 96.08 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बेशकीमती जंगल जल चुके हैं। अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक वनाग्नि की सर्वाधिक 110 घटनाएं अकेले गढ़वाल वृत्त के अंतर्गत पांच वन प्रभागों में रिकॉर्ड की गईं। जिसमें 56 घटनाएं आरक्षित जबकि 54 घटनाएं सिविल वनों में दर्ज की गईं।
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अभी तक बदरीनाथ वन प्रभाग में सर्वाधिक 41 घटनाएं हो चुकी हैं। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में वनाग्नि की कुल 30 घटनाओं में से 10 आरक्षित व 20 सिविल वनों में हुईं। जिससे करीब 65 हेक्टेयर में जंगल जल गए। बीते साल इसी अवधि में महज तीन -तीन घटनाएं आरक्षित व सिविल वनों में दर्ज हुई थीं।