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उत्तराखंड के पहले ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन का रास्ता साफ
आलोक पंवार/ अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Wed, 30 Nov 2016 11:29 AM IST
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- फोटो : getty images
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उत्तराखंड के पहले ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन खुलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। योजना के तहत प्रस्तावित भूमि के अधिग्रहण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सशर्त सहमति मिल गई है।
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राज्य परिवहन विभाग के मुताबिक वन विभाग की कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद भूमि विभाग को हस्तांतरित होगी। इसके बाद योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हरिद्वार बाईपास मार्ग पर सहायक संभागीय परिवहन मांग की थी। राज्य परिवहन विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने भूमि का सर्वे कर प्रस्ताव केंद्र को भेजा था।
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देर से ही सही आखिरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन के लिए प्रस्तावित भूमि को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है। खास बात यह कि योजना के लिए केंद्र ने प्रस्तावित भूमि 2.22 हेक्टयर की जगह 1.2 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण को स्वीकृति प्रदान की है। इसकी पुष्टि ऋषिकेश रेंज के वन क्षेत्राधिकारी गंगा सागर नौटियाल ने की है। बताया कि केंद्र की ओर राज्य परिवहन विभाग को दी जाने वाली भूमि के बाबत पत्र दो दिन पहले मिला है।
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क्या है ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन
अभी तक उत्तराखंड राज्य में चारधाम यात्रा पर संचालित और राज्य परिवहन निगम के वाहनों की फिटनेस मैनुअल होती है। इसमें गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन खुलने के बाद सभी व्यावसायिक और प्राइवेट वाहनों की फिटनेस कंप्यूटरीकृत स्वचालित मशीनों से होगी। वाहन ओके होने के बाद ही टेस्टिंग लेन से बाहर आएगा। वाहनों की कंप्यूटरीकृत फिटनेस से हादसों में भी कमी आएगी। इससे श्रम और समय की बचत भी होगी।
योजना के लिए प्रस्तावित भूमि को भारत सरकार ने कुछ शर्तों के साथ सैद्धांतिक सहमति दी है। बाईपास मार्ग पर वनभूमि में खड़े पेड़ों के कटान और छपान के एवज में एक निश्चित धनराशि वन विभाग में जमा कराने, प्रस्तावित भूमि के बदले अन्यत्र वन भूमि में पौधरोपण आदि प्रक्रिया के बाद ऑटोमेटिक टेस्टिंग लेन के लिए भूमि राज्य परिवहन विभाग को हस्तांतरित होगी। यह प्रक्रिया पूरी होते ही योजना को क्रियान्वित किया जाएगा।
- डा. अनीता चमोला, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, ऋषिकेश