उत्तराखंडः अभी फायर सीजन शुरू नहीं हुआ और धधकने लगे जंगल, दो दिनों से लगी आग पर पाया काबू
- उर्गम घाटी के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू
विस्तार
दो दिनों से आग से धधक रहे उर्गम घाटी के जंगलों की आग पर काबू पा लिया गया है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के छह कर्मचारियों ने शुक्रवार सुबह पांच बजे आग पर काबू पाया। आग से घाटी में कई हेक्टेयर वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है।
अभी फायर सीजन शुरू ही नहीं हुआ, लेकिन चमोली जिले में जंगल धधकने लगे हैं। उर्गम घाटी में दो दिनों तक जंगल में लगी आज से कई हेक्टेयर वन संपदा जल चुकी है। इससे पूर्व पीपलकोटी के समीप की पहाड़ियों पर भी आग लगी थी, लेकिन वन विभाग के कर्मियों ने आग बुझाने में तत्परता दिखाई।
पार्क के वन क्षेत्राधिकारी धीरेश चंद्र बिष्ट ने बताया कि आग सुदूर वन क्षेत्र में पहुंच गई थी, जिसे बुझाने के लिए छह कर्मचारियों को लगाया गया था। अब क्षेत्र में कहीं भी जंगल में आग नहीं है। जंगल में आग लगाने वाले का पता लगाया जा रहा है।
वनों को आग से बचाने के लिए सहयोग की अपील
उत्तरकाशी वन प्रभाग की बाड़ाहाट रेंज द्वारा हीना गांव में वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वन कर्मियों ने ग्रामीणों को फायर सीजन के दौरान वन एवं वन्य जीवों को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। साथ ही जंगलों को आग से बचाने में सहयोग की अपील की।
भटवाड़ी ब्लॉक के हीना गांव में वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठी प्रधान आरती मखलोगा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। गोष्ठी में ग्रामीणों को फायर सीजन के दौरान वन संपदा को होने वाले नुकसान के साथ ही आग से बचाव के तरीके भी बताए गए।
वन रक्षक नरेंद्र सिंह ने ग्रामीणों से गर्मियों में जंगल से लगे खेतों में घास आदि को सावधानी से जलाने की अपील की। इस मौके पर जगदीश चंद्र, शीशपाल असवाल, कुशमा देवी, चंद्रमाला देवी, सुमिला देवी, जगदेई आदि अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
जंगलों की आग से निपटने को कुमाऊं में वन विभाग तैयार
शनिवार से शुरू होने जा रहे फायर सीजन को देखते हुए कुमाऊं में वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिविल सोयम वन प्रभाग और अल्मोड़ा वन प्रभाग दोनों में करीब 300 से अधिक फायर वॉचर वनों की निगरानी करेंगे। बागेश्वर में वनाग्नि रोकने के लिए जिले की छह वन रेंजों बागेश्वर, गढ़खेत, कपकोट, धरमघर, ग्लेशियर और बैजनाथ में 30 क्रू स्टेशन बनाए हैं।
जिले में पिछले साल 184.17 हेक्टेयर जंगल जल गए थे। इससे 163.17 हेक्टेयर आरक्षित वन और 21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पंचायती वनों को नुकसान हुआ। वन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 के अग्निकाल में बागेश्वर जिले में वनाग्नि की 120 घटनाएं हुईं। आग लगने की 104 घटनाएं आरक्षित और 16 घटनाएं वन पंचायतों में हुई। बागेश्वर रेंज में 31, बैजनाथ रेंज में 8, गढ़खेत रेंज में 41, धरमघर रेंज में 14, कपकोट रेंज में 26 घटनाएं हुई।
बागेश्वर जिले में 1064 वर्ग किमी हिस्सा वनों से आच्छादित है। इसमें 660 वर्ग किमी में आरक्षित वन, 24 वर्ग किमी में सिविल वन और 380 वर्ग किमी पंचायती वन भूमि है। वन भूभाग में 80 फीसदी जंगल चीड़ और शेष 20 फीसदी में बांज, फल्याट, कसनार, तुन, क्वैराल, अंगु, मेहल आदि प्रजातियों के मिश्रित वन हैं।
वन रेंजों में क्रू स्टेशन बनाए गए
चंपावत जिले में अग्नि सुरक्षा के लिए 55 क्रू स्टेशनों के अलावा 110 फायर वॉचर रखे जा रहे हैं। डीएफओ कार्यालय को मास्टर नियंत्रण कक्ष और हर रेंज में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। चंपावत क्षेत्र में 62098.32 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र के अलावा 36780.563 हेक्टेयर पंचायती और 22815.7 हेक्टेयर सिविल वन हैं। रानीखेत क्षेत्र इस साल विभाग ने सात क्रू स्टेशन बनाए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में सात श्रमिक तैनात किए जा रहे हैं। पिछले फायर सीजन में आग लगने की सबसे ज्यादा 111 घटनाएं हुईं। इनमें 150.35 हेक्टेयर वन क्षेत्रफल को नुकसान पहुंचा है।
पिथौरागढ़ जिले में 759853 हेक्टेयर आरक्षित वन हैं। 277175 हेक्टेयर पंचायती वन और 41748 हेक्टेयर सिविल वन हैं। जिले में 89 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। जिले की सातों रेंजों पिथौरागढ़, डीडीहाट, अस्कोट, धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में सौ विभागीय स्टॉफ है। साथ ही 40 हजार किसानों को वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग के लिए एसएमएस पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। पिछले वर्ष आरक्षित वन में आग की कुल 55 घटनाओं में 108 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। पंचायती एवं सिविल वनों में 80 घटनाओं में 187.75 हेक्टयर क्षेत्र आग से राख हो गया था।
फायर सीजन में जंगलों में होने वाली आग की घटनाओं को रोकने के लिए कंट्रोल बर्निंग और फायर लाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है। वन रेंजों में क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। वनाग्नि रोकने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
- मयंक शेखर झा डीएफओ बागेश्वर
इस बार दो बार बर्फबारी और अच्छी खासी बारिश होने से अभी जंगलों में तपिश नहीं है। नमी के चलते कंट्रोल बर्निंग भी नहीं हो सकी है। अलबत्ता दावाग्रि से बचाव को कार्ययोजना तैयार करने के साथ पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। दावाग्रि से बचाव को बजट की मांग की गई है।
- केएस बिष्ट-वन संरक्षक, चंपावत