उत्तराखंड एक्सक्लूसिव: शहद उत्पादन अपनाओ और 80 प्रतिशत सब्सिडी पाओ
- एक मौन बॉक्स पर सरकार देगी 3200 रुपये का अनुदान
- जिलों में न्याय पंचायत स्तर पर मधु ग्राम बनाने की प्रक्रिया शुरू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से शहद उत्पादन अपनाने पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। एक मौन बॉक्स पर 3200 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। राज्य में मौनपालन के लिए सरकार ने जिलों में न्याय पंचायत स्तर पर मधु ग्राम बनाने की योजना शुरू की है।
प्रदेश में लगभग साढ़े छह हजार लोग 71 हजार मौन बॉक्सों में शहद उत्पादन कर रहे हैं। प्रदेश में उत्पादित शहद की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण यह विदेशों में भी निर्यात होता है। प्रदेश से सालाना 200 करोड़ का शहद निर्यात किया जाता है। राज्य में फल, सब्जी, फूलों की खेती के साथ ही सरकार का शहद उत्पादन बढ़ाने पर फोकस है।
इसके लिए सरकार ने मधु ग्राम योजना में मौनपालन व्यवसाय अपनाने पर 80 प्रतिशत सब्सिडी देने की व्यवस्था की है। एक मौन बॉक्स की कीमत चार हजार रुपये है। 20 मौन बॉक्स की कीमत 80 हजार होगी। लेकिन यदि कोई लाभार्थी मौनपालन को अपनाना चाहता है तो 16 हजार में 20 मौन बॉक्स से शहद उत्पादन शुरू कर सकता है। एक मौन बॉक्स से 20 से 22 किलोग्राम तक शहद तैयार होता है।
ये है मधु ग्राम की योजना
सरकार ने मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए मधु ग्राम योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर पर एक मधु ग्राम स्थापित किया जाएगा। जिसमें सरकार की ओर से 500 मौन बॉक्स दिए जाएंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में एपिस सिराना इंडिका और मैदानी क्षेत्रों में एपिस मैलीफेरा मधुमक्खी मौन बाक्स के साथ दी जाएगी। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी जिला उद्यान अधिकारियों के माध्यम से मौनपालन करने वाले लाभार्थियों का चयन किया जा रहा है।
कोविड महामारी से बढ़ी शहद की मांग
प्रदेश में सालाना 2200 मीट्रिक टन शहद उत्पादन होता है। कोविड महामारी के दौरान शहद की मांग बढ़ी है। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादित शहद 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। सरकार की योजना है कि मधु ग्राम योजना के न्याय पंचायत स्तर पर उत्पादित शहद को एकत्रित कर दूसरे देशों को निर्यात किया जाएगा। इससे मौनपालकों को ज्यादा दाम मिलेंगे।
उत्तराखंड में मौनपालन स्वरोजगार का सबसे बढ़िया साधन है। मौनपालन से कम मेहनत पर ज्यादा आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर मधु ग्राम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड के शहद की काफी मांग है।
-एचसी तिवारी, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग
किसानों की आर्थिकी किस तरह से मजबूत हो सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं है। यहां का शहद जैविक है। सरकार ने मौनपालन के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी देने की व्यवस्था की है।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री