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उत्तराखंड में कांग्रेस के सत्ता से बेदखल होने के पांच कारण

Sat, 11 Mar 2017 05:07 PM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट Updated Sat, 11 Mar 2017 05:07 PM IST
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uttarakhand Election Results 2017: Congress defeat in Uttarakhand few factors

उत्तराखंड की जनता ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को बेदखल कर भाजपा को स्पष्ट बहुमत का जनादेश दिया है। भाजपा को 70 में 57 सीट और कांग्रेस को महज 11 सीटें मिली हैं। अन्य  की झोली में मात्र 2 सीटें गई।  उत्तराखंड में कांग्रेस का एकमात्र चेहरा मुख्यमंत्री हरीश रावत को बड़ा झटका लगा है।

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हरीश रावत दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़े और दोनों सीट से जनता ने उन्हें नकार दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के इस चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद अब प्रदेश में कांग्रेस को वापस सत्ता पाने के लिए लंबा वनवास काटना पड़ेगा। चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस को पीछे मुड़कर देखना होगा और गंभीर मंथन की जरूरत होगी।

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पूरा चुनाव वन मेन आर्मी की तरह रावत पर केंद्रित रहा

uttarakhand Election Results 2017: Congress defeat in Uttarakhand few factors

उत्तराखंड में चुनाव पूरी तरह कांग्रेस का एक मात्र चेहरा माने जा रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत पर ही केंद्रित रहा। पार्टी को इस बात की गलतफहमी रही कि पूरा चुनाव हरीश रावत के दम पर लड़ा जाऐ। लेकिन रणनीति गलत साबित हुई।

हालांकि हरीश रावत ने अकेले वन मेन आर्मी की भूमिका में पूरी ताकत से चुनाव लड़ा। हरीश रावत पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान में आरोप भी लगाए कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को साथ नहीं लिया अकेले ही खुद को आगे कर चुनाव मैदान में रहे।

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हाशिये पर रहा संगठन, टिकटों के आवंटन में चली रावत की मनमानी

uttarakhand Election Results 2017: Congress defeat in Uttarakhand few factors

पूरे चुनाव में हरीश रावत अहम भूमिका में रहे और चुनाव प्रचार में उन्होंने पूरी ताकत झौंक दी। उन पर आरोप लगते रहे कि चाहे टिकट बंटवारे को लेकर हो या चुनाव
रणनीति में संगठन के दिग्गज नेताओं की राय को दरकिनार कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस संगठन लगातार हरीश रावत से नाराज चलता रहा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के हरीश रावत से नाराजगी और मतभेद की खबरें भी सामने आईं। हालांकि हरीश रावत संगठन से उनके मतभेद की बातों को खारिज करते रहे। टिकट आवंटन में भी सीएम हरीश रावत की ही चली। उन पर चहेतों को टिकट बांटने के आरोप लगे।

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सांगठनिक नेटवर्क की अनदेखी कर पीके पर जताया प्रचार का भरोसा

uttarakhand Election Results 2017: Congress defeat in Uttarakhand few factors
पार्टी में बगावत और भितरघात
कांग्रेस में बगावत और भीतरघात भी हार का अहम कारण बना। पार्टी के नौ विधायकों ने बगावत कर दलबदल कानून के तहत भाजपा का दामन थामा। पूर्व सीएम विजय
बहुगुणा, हरक सिंह रावत अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन, कुंवर प्रणव सिंह, सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, शैला रानी रावत और उमेश शर्मा ने पार्टी से बगावत कर भाजपा का
दामन थामा।

सांगठनिक नेटवर्क की अनदेखी कर पीके पर जताया प्रचार का भरोसा
कांग्रेस की हार में कहीं न की चुनाव प्रचार भी एक फेक्टर के तौर पर रहा है। हरीश रावत ने प्रदेश में प्रचार के लिए सांगठनिक नेटवर्क को दरकिनार कर प्रशांत किशोर को
पूरे प्रचार का जिम्मा सौंप दिया। हरीश रावत के इस कदम से ग्राउंड लेबल पर काम कर रहे पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाखुश ही दिखाई दिए।

नोटबंदी से कांग्रेस प्रचार पर पैसा खर्च नहीं कर पाई
मोदी लहर के साथ ही नोटबंदी भी कहीं न कहीं उत्तराखंड में कांग्रेस की हार का कारण बनी। लिहाजा नोटबंदी ने प्रचार के लिए खर्च किया जाने वाले पैसे पर ब्रेक लगा दिया
जिसका सीधा असर पार्टी के प्रचार पर पड़ा। विशेषज्ञ मानते हैं कि कांग्रेस नोटबंदी के चलते चुनाव प्रचार में बेहद कम पैसा खर्च पाई।
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