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Uttarakhand Election 2022: खर्च की नजर से 'पहाड़' जैसा मुश्किल है उत्तराखंड का चुनाव, खास रिपोर्ट

Wed, 19 Jan 2022 01:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 19 Jan 2022 01:47 PM IST
सार

2017 के मुकाबले इस बार का चुनाव जरा महंगा है। चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशी हों या विश्लेषक, कोविड काल में वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की राह भी इस बार खासी खर्चीली है।

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Uttarakhand Election 2022: Uttarakhand election is very difficult from the point of view of expenditure
रुपये (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay

विस्तार

पर्वतीय और मैदानी विधानसभा क्षेत्रों से सुसज्जित उत्तराखंड की विधानसभा तक पहुंचने के लिए खर्च की परंपरा भी पहाड़ जैसी मुश्किल है। यहां बड़े दल और उनके प्रत्याशी तो जमकर खर्च करते हैं लेकिन छोटे दल इस दौड़ में पिछड़ जाते हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की पिछले चुनाव की रिपोर्ट देखें तो यह बात पुख्ता भी हो जाती है। हालांकि इस बार चुनाव आयोग ने प्रत्याशी के खर्च की अधिकतम सीमा 28 लाख से बढ़ाकर 40 लाख कर दी है।

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साल 2017 के मुकाबले इस बार का चुनाव जरा महंगा है। चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशी हों या विश्लेषक, कोविड काल में वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की राह भी इस बार खासी खर्चीली है। सोशल मीडिया में मतदाताओं तक रीच बढ़ाने के लिए खासा खर्च करना पड़ेगा। वहीं, प्रचार सामग्री भी 2017 के चुनाव के मुकाबले करीब 40 फीसदी महंगी हो गई है। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए खर्च भी एक बड़ी चुनौती बनने वाली है।
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वर्ष 2017 के चुनाव में खर्च की सीमा 28 लाख थी, जो कि अब प्रत्येक प्रत्याशी के लिए बढ़ाकर 40 लाख कर दी गई है। लेकिन इस सीमा के तहत छोटे दलों के पास कितना पैसा खर्च करने को होगा, यह आने वाला समय बताएगा। राजनीतिक विश्लेषक यह मानते भी हैं कि इस दौड़ में पैसा न होने की वजह से छोटे दल काफी पिछड़ जाते हैं। 
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धरे रह जाते हैं खर्च के मानक

वैसे तो चुनाव आयोग हर प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा तय करके रखता है लेकिन पर्दे के पीछे प्रत्याशी और उनके समर्थक खर्च के मानकों को भी दरकिनार कर देते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वैसे तो पिछले चुनाव में 28 लाख की खर्च सीमा थी लेकिन बड़ी सीटों पर बड़े दलों के प्रत्याशियों के लिए खर्च करोड़ों तक पहुंचना आम बात है।

ये थे 2017 में सर्वाधिक खर्च करने वाले तीन विधायक

विधायक का नाम- खर्च(लाख रुपये में)
अरविंद पांडेय (गदरपुर)- 27,62,081
सुबोध उनियाल (नरेंद्रनगर)- 26,65,909
राजकुमार ठुकराल (रुद्रपुर)- 25,12,239

ये थे 2017 के चुनाव में सबसे कम खर्च करने वाले तीन विधायक

राजकुमार (पुरोला)-7,13,293
मनोज रावत (रुद्रप्रयाग)- 8,07,803
खजान दास (राजपुर रोड)- 9,05,264 

सबसे ज्यादा खर्च करने वाले 10 विधायक

अरविंद पांडेय, सुबोध उनियाल, राजकुमार ठुकराल, गणेश जोशी, पुष्कर सिंह धामी, प्रेम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, देशराज कर्णवाल, नवीन चंद्र दुम्का और यशपाल आर्य।

सबसे कम खर्च करने वाले 10 विधायक

राजकुमार, मनोज रावत, खजान दास, दिलीप रावत, प्रेमचंद अग्रवाल, गोपाल रावत, आदेश सिंह, केदार सिंह, यतीश्वरानंद और प्रीतम सिंह पंवार।

2017 के चुनाव खर्च पर एक नजर (एडीआर रिपोर्ट)

- उत्तराखंड के 70 विधायकों ने अपने चुनाव में औसतन 16.17 लाख रुपये खर्च किया, जो कि 28 लाख की खर्च सीमा का 58 प्रतिशत है।
- भाजपा के 57 विधायकों ने औसतन 16 लाख 64 हजार, कांग्रेस के 11 विधायकों ने औसतन 14 लाख 33 हजार रुपये और दो निर्दलीयों ने 12.80 लाख के हिसाब से खर्च किया।
- भाजपा के 57 विधायकों ने स्टार प्रचारकों पर औसतन दो लाख नौ हजार प्रति विधायक खर्च किया। कांग्रेस के 11 विधायकों ने औसतन 62 हजार रुपये प्रति विधायक खर्च किया था।
- भाजपा के विधायकों को पार्टी से 58 प्रतिशत खर्च और कांग्रेस के विधायकों को पार्टी से छह प्रतिशत खर्च की रकम मिली।

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