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Uttarakhand Election 2022: भाजपा के पूर्व दर्जाधारी के बगावती तेवर, तो वहीँ पत्नी को टिकट की वकालत में विधायक ने नड्डा को लिखा पत्र 

Fri, 21 Jan 2022 05:58 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 21 Jan 2022 05:58 PM IST
सार

 दिनेश रावत ने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को भी मौका मिलना चाहिए। वह पिछले 15 से ज्यादा सालों से कैंट क्षेत्र में तैयारी कर रहे हैं।

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Uttarakhand Election 2022: Rebellious attitude of BJP leader dinesh rawat angry over giving ticket to Savita Kapoor in Cantt seat
दिनेश रावत - फोटो : amar ujala

विस्तार

देहरादून के कैंट क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता और रेशम फैडरेशन के पूर्व पदाधिकारी दिनेश रावत ने सविता कपूर को टिकट दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पहले आठ बार एक परिवार को टिकट दिया गया। अब फिर उसी परिवार को टिकट देकर परिवारवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को भी मौका मिलना चाहिए। वह पिछले 15 से ज्यादा सालों से कैंट क्षेत्र में तैयारी कर रहे हैं। पार्टी को उनके संघर्ष और मेहनत का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य कार्यकर्ताओं को भी मौका मिलना चाहिए।
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रावत ने कहा कि ये पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं है। प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी बात कहने का अधिकार है। हम केवल पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रख रहे हैं। अगर पार्टी ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

पत्नी को टिकट की वकालत में विधायक ने नड्डा को लिखा खुला पत्र 

हरिद्वार जिले की झबरेड़ा विधानसभा सीट से अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग कर रहे वर्तमान भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नाम खुला पत्र लिखा। उन्होंने अपनी पत्नी वैजयंती माला के पिछले चुनावों में जीत, जातिगत समीकरण और खुद के विधायक रहते हुए किए गए कार्यों का हवाला देते हुए टिकट की मांग की है।

प्रदेश में जिन 11 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं, उनमें दो सीटें हरिद्वार जिले की झबरेड़ा और पिरान कलियर भी हैं। झबरेड़ा में सिटिंग विधायक देशराज कर्णवाल अपनी पत्नी वैजयंती माला के लिए टिकट मांग रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि इस क्षेत्र से वे और उनकी पत्नी तीन बार जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 1995 में वैजयंती माला ने बसपा के पूर्व विधायक को जिला पंचायत के चुनाव में शिकस्त दी थी। जबकि, इस बाद पूर्व विधायक के पुत्र बसपा से प्रत्याशी हैं। उन्होंने जातिगत आंकड़ा देते हुए लिखा है कि जितने भी दोवदार टिकट मांग रहे हैं, उनसे संबंधित वोटरों की संख्या दस प्रतिशत भी नहीं है। 

कई दावेदार क्षेत्र से बाहर के हैं। उन्होंने लिखा है कि इस सीट पर अल्पसंख्यक वोटों को हासिल करने वाला भाजपा प्रत्याशी ही जीत दर्ज कर सकता है। यह काम उन्होंने और उनकी पत्नी ने पिछले कई चुनाव में कर दिखाया है। वर्ष 2012 में भी उनकी पत्नी ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने खुद को पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता बताते हुए टिकट की मांग की है। विधायक कर्णवाल ने दावा करते हुए कहा कि ज्वालापुर, लक्सर और खानपुर में विधायकों की एंटी इनकंबेंसी उनसे ज्यादा थी। फिर भी पार्टी ने उन सीटों पर टिकट दिया है। यही नहीं, खानपुर में सिटिंग विधायक की पत्नी को भी टिकट दिया गया है। दावा किया कि वैजयंती माला उनसे बड़ी नेता हैं। 

दलितों की आवाज उठाना है मेरा कसूर : कर्णवाल 
संवाद से बातचीत में झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल का दर्द छलक आया। उनकी विधानसभा का टिकट होल्ड पर रखने के सवाल पर कर्णवाल ने कहा कि जिन अन्य सीटों पर विधायकों की एंटी इनकंबेंसी उनसे ज्यादा थी, उन्हें टिकट दे दिया गया, लेकिन उनका कसूर यह है कि उन्होंने विधानसभा में लगातार दलितों की आवाज उठाई। आरक्षण का मुद्दा उठाया। बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्ति को कार्यालय में लगाने के बाबत शासनादेश जारी कराया, सबसे ज्यादा विधायी कार्य किए। उन्होंने झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र के सर्वे में दर्शाई गई एंटी इनकंबेंसी का कारण कुछ भाजपा नेताओं की ओर से दिए गए गलत फीडबैक को बताया।

भाजपा में गंगोत्री से धारचूला तक असंतोष

विधानसभा चुनाव के लिए 59 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद भाजपा में गंगोत्री से लेकर धारचूला तक असंतोष फूट गया है। थराली से पार्टी विधायक देवी, द्वारहाट विधायक महेश नेगी ने तीखे तेवर दिखाए हैं। उधर, नरेंद्र नगर विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने भाजपा छोड़ने का फैसला किया है। वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

इधर, भाजपा टिकटों की घोषणा के बाद फूटे असंतोष को स्वाभाविक मान रही है। पार्टी उम्मीद कर रही है कि असंतोष का गुबार दो-तीन दिन में शांत होकर बैठ जाएगा। इस बीच गंगोत्री, यमुनोत्री, थराली, कर्णप्रयाग, कैंट, रायपुर, धर्मपुर विधानसभा से भी दावेदारों के असंतोष की सूचनाएं हैं। धारचूला में धन सिंह धामी को टिकट दिए जाने से नाराज पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।

द्वारहाट के विधायक महेश नेगी ने टिकट काटे जाने को साजिश करार दिया है। उनका दावा है कि वह सर्वे में सबसे आगे थे, लेकिन षड्यंत्र के तहत उनका टिकट काटा गया। नरेंद्र नगर से पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने पार्टी पर आरोप लगाया कि भाजपा में कोई नीति सिद्धांत नहीं रह गए हैं। इसलिए वह पार्टी छोड़ने को मजबूर हैं। भीमताल में भाजपा नेता मनोज साह ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है। नैनीताल सीट पर भी पार्टी नेताओं की नाराजगी है।

कई दावेदार कोपभवन में
टिकट न मिलने से कई दावेदार कोपभवन में चले गए हैं। कुछ ने पार्टी की गतिविधियों से किनारा कर लिया है। इधर, पार्टी भी दो-तीन दिन तक उन्हें छेड़ने के मूड में नहीं है। 

सीएम, प्रदेश अध्यक्ष व सांसदों को झोंका
भाजपा को जिन विधानसभा सीटों में असंतोष से नुकसान हो सकता है, वहां रुठों को मनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों व सांसदों को झोंक दिया गया है। वे दूरभाष के माध्यम से असंतुष्टों से संपर्क साध रहे हैं। उनके रिश्तेदारों के जरिये भी रूठों को मनाने की कोशिश की जा रही है।

संगठन और सरकार में तरजीह दिए जाने का भरोसा
असंतुष्टों को मनाने के लिए डेमेज कंट्रोल में जुटे नेता उन्हें आश्वासन दे रहे हैं। किसी को संगठन में जिम्मेदारी देने और किसी को राज्य में सरकार बन जाने पर दायित्व दिए जाने का भरोसा देकर मनाने की कोशिश हो रही है।

पार्टी ने बहुत सोच-विचार और सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों का चयन किया है। बहुत से लोग टिकट की उम्मीद कर रहे थे। उनकी नाराजगी स्वाभाविक है, लेकिन भाजपा परिवार के सदस्य हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही उनकी नाराजगी दूर हो जाएगी। 
- सुरेश जोशी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा 

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