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Uttarakhand Election 2022: 2016 में बरात लेकर गए थे हरक सिंह रावत, बाहर आए तो निपट अकेले

Tue, 18 Jan 2022 12:32 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 18 Jan 2022 12:32 PM IST
सार

बेशक 2016 में हुई बगावत का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया। लेकिन बगावत की पूरी पटकथा हरक सिंह रावत ने ही लिखी।

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Uttarakhand Election 2022: Harak Singh Rawat had taken many mla in 2016, when he came out, he is alone
हरक सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत सियासत के बदले नए रंग को देखकर फिलहाल दंग हैं। उन्होंने शायद सोचा नहीं था कि अचानक वह ऐसे सियासत के वेटिंग रूम में आ गए हैं। वह भी निपट अकेले। हरक सिंह रावत को 2016 में हुई उत्तराखंड की सियासत की सबसे बड़ी बगावत का सूत्रधार माना जाता है।

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बेशक इस बगावत का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया। लेकिन बगावत की पूरी पटकथा हरक सिंह रावत ने ही लिखी। लेकिन पिछले करीब पांच साल में सियासत का वह रंग नहीं रहा, जो 2016 में हरक सिंह छोड़ आए थे। तब कांग्रेस से पूरी बरात के साथ भाजपा में गए थे। तब विजय बहुगुणा के साथ तत्कालीन विधायक उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बतरा, कुंवर प्रणव चैंपियन, शैला रानी रावत, अमृता रावत, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल खूब हो हल्ले के साथ भाजपा में शामिल हुए और कांग्रेस सरकार गिर गई। 
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2022 चुनाव में एक बार फिर सत्ता के भीतर बगावत की पुरानी कहानी दोहराने की चर्चाएं गरमा रही थीं। एक बार फिर इस संभावित बगावत का सूत्रधार हरक सिंह रावत को बताया जा रहा था। सियासी हलकों में चर्चा गर्म थी कि हरक सिंह जिस बरात के साथ भाजपा में आए थे, उसकी साथ कांग्रेस में लौट जाएंगे। इससे पहले की चर्चा हकीकत में बदलती, भाजपा और उसकी सरकार ने हरक पर बर्खास्तगी तलवार चला दी। ऐसे वक्त में हरक सिंह के निपट अकेले हैं। 

अब तो हमसाया भी साथ नहीं
उनके साथ हर वक्त हम साया नजर आने वाले रायपुर के भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ भी नहीं है। काऊ कह रहे हैं कि वह अंतिम सांस तक भाजपा में रहेंगे। पार्टी जो भूमिका तय करेगी, उसे निभाएंगे। दो दिन पहले तक काऊ हरक सिंह के साथ दिल्ली तक गए थे। लेकिन वहां दोनों की राहें जुदा हो गईं।

हरक का चरित्र मौसम की तरह बदलता है: त्रिवेंद्र 
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भाजपा से निष्कासित हरक सिंह रावत पर हमला बोलते हुए कहा कि हरक सिंह रावत का चरित्र मौसम की तरह बदलता है। वह घड़ियाली आंसू बहाते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वह एक ऐसे राजनेता हैं। जिसने कोई भी पार्टी नहीं छोड़ी और कालेज से लेकर उनकी राजनीति के पूरे जीवन को देखा जाए तो वह कभी एक विधान सभा से चुनाव नहीं लड़े। उन्होंने कहा कि वह देवी देवताओं के नाम पर रोते हैं।

उन्होंने हरक सिंह की कालेज की राजनीति को याद करते हुए कहा कि उन्हें याद है जब कालेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। उस दौरान चुनाव से तीन दिन पहले उन्होंने उनका साथ छोड़ दिया। जो एनएसयूआई के बैनर तले चुनाव लड़ गए। हरक कभी किसी एक दल के नहीं रहे। वह कभी जनता दल फिर कांग्रेस फिर भाजपा और फिर कांग्रेस यही करते रहते हैं। उनके चरित्र की खास बात यह भी है कि वह घड़ियाली आंसू बहाना, आंसू बहाकर इमोशनल ब्लैकमेलिंग करते हैं।

हरक ने केवल भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का मॉडल पेश किया

भाजपा से निष्कासित किए गए पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री से पहले ही केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक मनोज का कहना है कि हरक सिंह रावत ने भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का मॉडल पेश किया है। डॉ. हरक के कुप्रबंधन के दर्जनों मामले उनके पास हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर वह सामने रखेंगे। दरअसल, भाजपा में रहते डॉ. हरक सिंह रावत तीन विधानसभा सीटों केदारनाथ, लैंसडोन और डोईवाला की डिमांड कर रहे थे। लेकिन इसके बाद उनकी भाजपा से विदाई हो गई। 

अब उनके कांग्रेस में आने की अटकलों के बीच इन सीटों पर पहले से तैयारी कर रहे कांग्रेस पार्टी के दावेदारों का बैचेन होना स्वभाविक है। ऐसे में केदारनाथ से कांग्रेस पार्टी के विधायक मनोज रावत ऐसी नौबत आने से पहले ही हमलावर हो गए हैं। अमर उजाला से बातचीत करते हुए मनोज ने कहा कि डॉ. हरक सिंह रावत लोकतंत्र के हत्यारे हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी में लिया ही नहीं जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा में मंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार ओर कुप्रबंधन का मॉडल पेश किया है। उनका कार्यकाल उनके विभागों में भ्रष्टाचार के लिए जाना जाएगा। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण कर्मकार बोर्ड से लेकर कोटद्वार में फर्जी मेडिकल कॉलेज है। जिसके निर्माण के लिए एक संस्था को बिना अनुमति दो करोड़ रुपये जारी कर दिए गए। 

उन्होंने जब यह मुद्दा विधानसभा में उठाया, तब वह पैसे सरकार को वापस करने पड़े। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब किसी डीपीआर के नाम पर दो करोड़ रुपये घूस के रूप में दिए गए। उन्होंने कहा कि तब से डॉ. हरक को सपने में भी मनोज रावत और केदारनाथ सीट याद आती है। उन्होंने कहा कि उनके पास हरक सिंह रावत से जुड़े ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनका वह वक्त आने पर खुलासा करेंगे। 

हरक सिंह की असलियत पहचान चुकी है प्रदेश की जनता 
दल-बदल को लेकर आम आदमी पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर निशाना साधा है। आप का कहना है कि उत्तराखंड में दलबदलू नेताओं ने राज्य आंदोलनकारी शहीदों के सपने तोड़े हैं। ऐसे नेताओं के असली चेहरे को प्रदेश की जनता भलीभांति पहचान चुकी है। भाजपा में रहते हुए हरक सिंह जिनको गाली देते थे आज वे उनके आदरणीय बन गए हैं। सोमवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता में आप प्रवक्ता नवीन पिरशाली ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर दल बदल से भूचाल आ चुका है। प्रदेश की जनता नेताओं का कुर्सी लोभ देख रही है कि कैसे इन नेताओं का एक सूत्रीय कार्यक्रम है कि किसी भी प्रकार से सत्ता हासिल की जाए।

नेताओं ने दल बदल को अब व्यवसाय समझ लिया हैं। जो कभी कांग्रेस में जाते हैं तो कभी भाजपा में आते हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कांग्रेस में वापसी के लिए जिस तरह का नाटक रचा है, वह सबके सामने आ चुका है। कांग्रेस और भाजपा ने सिर्फ धोखा देने की राजनीति है। दल बदल करने वाले नेता उत्तराखंड बर्बादी के लिए जिम्मेदार हैं। पिरशाली ने कहा कि दल बदलू नेताओं ने प्रदेश के विकास की कोई चिंता नहीं है। उन्हें सिर्फ अपने परिवार और अपनी कुर्सी की चिंता है।

राज्य गठन के लिए जिन लोगों ने कुर्बानी दी है। आज 21 साल बाद भी उनके सपने पूरे नहीं हुए हैं। उत्तराखंड में जनहित के मुद्दों को लेकर राजनीति नहीं हो रही है। कांग्रेस व भाजपा के नेताओं को अपना हित सर्वोपरि है। प्रदेश की जनता ऐसे नेताओं के असली चेहरे को पहचान चुकी है और इसका जवाब देगी। आप प्रवक्ता ने कहा कि हरक सिंह ने कभी कहा था कि मैं मां धारी की कसम खाता हूं कि चुनाव नहीं लड़ लूंगा। लेकिन आज चुनाव लड़ने के साथ ही अपनी बहू को भी टिकट दिलाने के लिए दलबदल करने से कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं।

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