फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Election 2022: Difficult journey to become a star of Sitarganj

Uttarakhand Election 2022: मुश्किल भरा सितारगंज का सितारा बनने का सफर

Wed, 09 Feb 2022 02:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मो. यामीन अंसारी, संवाद न्यूज एजेंसी, सितारगंज
मो. यामीन अंसारी, संवाद न्यूज एजेंसी, सितारगंज Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 09 Feb 2022 02:00 PM IST
सार

सितारगंज सीट पर इस बार जीत हासिल करना नाकों चने चबाने से कम नहीं है। 

विज्ञापन
Uttarakhand Election 2022: Difficult journey to become a star of Sitarganj
सौरभ बहुगुणा

विस्तार

सितारगंज का सितारा बनकर चमकने की राह मुश्किल भरी है। इस सीट पर सर्वाधिक वोटरों वाले बंगाली और मुस्लिम समुदाय के हाथ में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला है। भाजपा के विधायक सौरभ बहुगुणा और कांग्रेस के नवतेज पाल सिंह के बीच सीधे मुकाबले को बसपा के पूर्व विधायक नारायण पाल और आप के प्रत्याशी अजय जायसवाल ने दिलचस्प बना दिया है।

विज्ञापन


इस सीट पर इस बार जीत हासिल करना नाकों चने चबाने से कम नहीं है। साल 2002 से लेकर 2012 तक दो बार के विधानसभा चुनाव में यह सीट बसपा के खाते में रही। पूर्व विधायक नारायण पाल विधायक रहे। 2012 में भाजपा ने बंगाली कार्ड खेलकर सीट अपने नाम कर ली। करीब चार महीने तक भाजपा के किरन चंद्र मंडल विधायक रहे।
विज्ञापन


उसके बाद किरन ने क्षेत्र के विकास की शर्त पर विधायकी से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा उपचुनाव लड़े। भाजपा ने भी बहुगुणा के विजय रथ को रोकने के लिए पूर्व वित्त मंत्री प्रकाश पंत को उनके सामने मैदान में उतारा था लेकिन सीएम बहुगुणा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...उत्तराखंड सत्ता संग्राम 2022:  बाजपुर सीट पर न मुद्दे, न बयार... जातीय समीकरणों पर हैं प्रत्याशी सवार

2016 में पूर्व सीएम बहुगुणा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। 2017 में अपने बेटे गोल्फ के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सौरभ बहुगुणा को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया और बहुगुणा से जनता के पारिवारिक रिश्ते की वजह से सौरभ भी भारी मतों से विजयी हुए, जबकि कांग्रेस का बंगाली कार्ड फेल हो गया और मालती विश्वास हार गईं।

कांग्रेस महंगाई, रोजगार, किसानों के मुद्दों पर मैदान में
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और युवा किसान नवतेज पाल सिंह बसपा से लड़कर तीसरे नंबर पर रहे। इस बार भाजपा ने फिर युवा नेता सौरभ बहुगुणा पर भरोसा जताते हुए चुनावी रण में उतारा है।

तराई में इस बार किसान आंदोलन को लेकर मुखर रही कांग्रेस और दिल्ली की आम आदमी पार्टी के मजबूती से चुनाव मैदान में उतरने से सियासी समीकरण भी बदल गए हैं।बसपा से पहले रविंद्र सिंह चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन कांग्रेस ने जब नवतेज को टिकट दिया तो पूर्व विधायक नारायण पाल ने कांग्रेस छोड़ दी और बसपा ने रविंद्र का टिकट काटकर पाल को चुनाव में उतार दिया।

भाजपा अपने कैडर वोट और विकास के नाम पर जीत का दावा कर रही है तो कांग्रेस महंगाई, रोजगार, किसानों के मुद्दों पर मैदान में है। वहीं, दो बार के विधायक रहे नारायण पाल भी दलित कैडर वोट के साथ अपनी छवि के दम पर बढ़त बनाने के प्रयास में लगे हैं। आप के अजय जायसवाल भी मजबूती के साथ डटे हुए हैं।

मौजूदा परिदृश्य में किसी भी सियासी दल के लिए जीत एकतरफा नहीं लगती। यही वजह है कि सभी दल बंगाली और मुस्लिम मतदाताओं के साथ ही सिख और दलित वोटों को रिझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। 

प्रत्याशियों की बात

इस बार किसी से मुकाबला नहीं है। एकतरफा भाजपा की लहर है। जनता के दिल में मेरे प्रति प्रेम व अटूट विश्वास है। विकास के कार्यों के दम पर चुनाव जीतूंगा। कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं में भी उत्साह है। रेलवे लाइन निर्माण, लंबित भूमिधरी अधिकार और बंगालियों को ओबीसी का दर्जा दिलाने के लिए काम किया जाएगा।
-सौरभ बहुगुणा, प्रत्याशी भाजपा।

बीजेपी से मुकाबला है। जनता का उत्साह देखते हुए जीत के प्रति आश्वस्त हूं। बेरोजगारी दूर करना, किसानों को उनका हक दिलाना, विकास कार्य, महिला सशक्तिकरण के लिए काम प्राथमिकता में हैं। अस्पतालों को उच्चीकृत कर उनमें स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई जाएंगी। चीनी मिल को पहले की तरह सरकार चलाएगी, बड़े उद्योग लाकर स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए काम होगा। -नवतेज पाल सिंह, प्रत्याशी कांग्रेस।

मुकाबला एकतरफा हो गया है। बसपा की जीत सुनिश्चित हो गई है। अन्य दल रनरअप के लिए जद्दोजहद में लगे हैं। चीनी मिल चालू कर उसमें एथनॉल व विद्युत संयंत्र लगाकर मिल को आगे बढ़ाऊंगा। शक्तिफार्म में डिग्री कालेज की स्थापना कराना, वहां के अस्पताल को उच्चीकृत कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाना, बैगुल व धौरा जलाशय में बसे लोगों को भूमिधरी अधिकार दिलाना प्रथामिकता रहेगी। खेलकूद के लिए स्टेडियम बनाए जाएंगे।
-नारायण पाल, प्रत्याशी बसपा।

भाजपा से सीधे मुकाबला है। भाजपा की जनविरोधी नीतियों की वजह से जनता अब परिवर्तन चाहती है। आप को लेकर मतदाताओं में बेहद उत्साह है। भारी मतों से जीतेंगे। सिडकुल में ठेकेदारी प्रथा खत्म की जाएगी। कच्चे मकान पक्के किए जाएंगे। जलाशय क्षेत्र से सटे गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाएंगे। सड़क, बिजली, पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा, हर महिला को प्रति महीने एक हजार रुपये, पांच हजार बेरोजगारी भत्ता, तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी।
-अजय जायसवाल, प्रत्याशी, आप।

सीट का इतिहास

2002 और 2007 में बसपा के नारायण पाल, परिसीमन के बाद 2012 में भाजपा के किरन चंद्र मंडल विधायक बने, लेकिन विकास की शर्त पर सीट छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए और उपचुनाव में कांग्रेस के सीएम विजय बहुगुणा विधायक बने। 2017 में पूर्व सीएम बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा भाजपा विधायक बने।

मतदाता
कुल-1,22,713
पुरुष-64283
महिला-58427
ट्रांसजेंडर-03

स्थानीय मुद्दे
तीन दशक से भी पुरानी रेलवे लाइन निर्माण, सितारगंज की दि किसान सहकारी चीनी मिल चलाने, किसानों की फसलों को वाजिब दाम, तौल केंद्रों पर फसलों की सुगमता से बिक्री, सिडकुल का विकास, रोजगार, शक्तिफार्म में सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं देने के मुद्दे हैं। बंगालियों की वर्षों पुरानी एससी की मांग के सिरे न चढ़ने पर अब पिछले छह महीनों से ओबीसी के आरक्षण का मुद्दा गरमाया है। खरीद फरोख्त की पट्टे वाली भूमि पर मालिकाना हक, वन व जलाशय की भूमि पर बसे लोगों को भूमिधरी अधिकार, मुस्लिमों के लिए मदरसों की स्थापना, आधुनिकीकरण आदि मांगें प्रमुख हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed