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Uttarakhand Election 2022: कांग्रेस ने पांच और बागी किए निष्कासित, अब तक नौ को दिखा चुकी बाहर का रास्ता
Sat, 05 Feb 2022 09:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 05 Feb 2022 09:17 PM IST
सार
विधानसभा चुनाव में तमाम सीटों पर कई नेताओं ने बगावती तेवर दिखाते हुए अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन किया है। पार्टी के वरष्ठि नेताओं के मनाने पर कई नेताओं ने नामांकन वापस ले लिया लेकिन कुछ अभी भी मैदान में डटे हैं। जिसे पार्टी ने अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Twitter/@INCIndia
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विस्तार
कांग्रेस से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे छह और नेताओं पर पार्टी ने कार्रवाई की है। पूर्व विधायक भीमलाल आर्य समेत पांच नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इससे पूर्व चार प्रमुख नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। इस तरह पार्टी अब तक नौ प्रमुख नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है।
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विधानसभा चुनाव में तमाम सीटों पर कई नेताओं ने बगावती तेवर दिखाते हुए अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मनाने पर कई नेताओं ने नामांकन वापस ले लिया लेकिन कुछ अभी भी मैदान में डटे हैं। जिसे पार्टी ने अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की है।
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव संगठन मथुरादत्त जोशी ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। पूर्व विधायक भीमलाल आर्य को घनसाली सीट पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी धनीलाल शाह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने पर निकाला गया है।
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वहीं, किरन डालाकोटी को भी निष्कासित किया गया है। डालाकोटी लालकुआं सीट पर हरीश रावत के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं संध्या डालाकोटी के पति हैं। संध्या को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। इनके अलावा ज्वालापुर सीट से पार्टी प्रत्याशी रवि बहादुर के खिलाफ मैदान में उतरे एसपी सिंह इंजीनियर, बागेश्वर सीट से पार्टी प्रत्याशी रंजीत दास के खिलाफ मैदान में उतरे बालकिशन और भैरवनाथ टम्टा को भी निकाल दिया गया है।
पहले चार बागियों को किया था बाहर
इससे पहले लालकुआं सीट पर पूर्व सीएम हरीश रावत के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरीं संध्या डालाकोटी, रामनगर सीट से महेंद्र सिंह पाल के खिलाफ ताल ठोक रहे संजय नेगी, रुद्रप्रयाग में अधिकृत प्रत्याशी प्रदीप थपलियाल के खिलाफ मैदान में उतरे पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी और यमुनोत्री सीट पर पार्टी प्रत्याशी दीपक बिजल्वाण के खिलाफ मैदान में उतरे संजय डोभाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों व अनुशासनहीनता के चलते छह साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है।
भितरघात और असंतोष को थामने के लिए पदों की बरसात
राज्य में गतिमान विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशियों को भितरघात और असंतोष से बचाने के लिए पदों की बरसात का रास्ता निकाला है। इसके लिए अब तक सौ से अधिक पदों पर असंतुष्टों को एडजस्ट किया जा चुका है। आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर और भी विस्तार किया जा सकता है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से पार्टी की कमान गणेश गोदियाल को मिली तो उन्हें लंबे समय तक संगठन में फेरबदल करने का मौका ही नहीं मिला। इसके बाद हरीश रावत के एक ट्वीट ने पार्टी में बगावत का तूफान खड़ा किया तो उसी दौरान सुलह की मेज पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी फ्री हैंड कर दिया गया। इसके बाद गोदियाल ने तमाम नियुक्तियां कीं। इसी बीच विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर बगावती तेवर दिखाते हुए कई नेताओं ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर ताल ठोक दी। इनमें से कुछ को तो मना लिया गया, लेकिन जो नहीं माने उन पर कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ऐसे नौ से अधिक नेताओं पर अब तक छह साल के लिए पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है।
वहीं जो नेता मान गए उन्हें पार्टी ने ससम्मान संगठन में जगह दी है। इनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण का नाम प्रमुख हैं, जिन्हें पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। शूरवीर सजवाण ने ऋषिकेश विधानसभा सीट से नामांकन दर्ज कराया था, लेकिन अंतिम समय पर उन्हें मना लिया गया। इस तरह से एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ अब पार्टी में पांच कार्यकारी अध्यक्ष हो गए हैं। वहीं इसी सीट पर शूरवीर का साथ दे रहे राजपाल खरोला को भी संगठन में उपाध्यक्ष पद पर एडजस्ट किया गया है।
लैंसडौन सीट पर तैयारी कर रही ज्योति रौतेला को महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट किया गया है। इस सीट पर पार्टी ने हरक सिंर रावत की पुत्रवधु अनुकृति गुसाई को प्रत्याशी बनाया है। वहीं राजपुर सीट से दावेदारी पेश कर रही कमलेश रमन और कैंट सीट से दावेदारी पेश कर रही आशा मनोरमा डोबरियाल को महिला कांग्रेस में वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर शांत किया गया है। इनके अलावा सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को सचिव पद पर नवाजा गया है। इनमें कुछ पद महामंत्री और प्रवक्ता के भी शामिल हैं।
पार्टी में तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव में निश्चित रूप से इनका लाभ पार्टी को मिलेगा। पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को यह अधिकार सौंपा है कि वह कार्यकर्ताओं को पदों से नवाज सकते हैं। संगठन में विस्तार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
- मथुरादत्त जोशी, महामंत्री संगठन, पीसीसी
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से पार्टी की कमान गणेश गोदियाल को मिली तो उन्हें लंबे समय तक संगठन में फेरबदल करने का मौका ही नहीं मिला। इसके बाद हरीश रावत के एक ट्वीट ने पार्टी में बगावत का तूफान खड़ा किया तो उसी दौरान सुलह की मेज पर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी फ्री हैंड कर दिया गया। इसके बाद गोदियाल ने तमाम नियुक्तियां कीं। इसी बीच विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर बगावती तेवर दिखाते हुए कई नेताओं ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर ताल ठोक दी। इनमें से कुछ को तो मना लिया गया, लेकिन जो नहीं माने उन पर कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ऐसे नौ से अधिक नेताओं पर अब तक छह साल के लिए पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है।
वहीं जो नेता मान गए उन्हें पार्टी ने ससम्मान संगठन में जगह दी है। इनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण का नाम प्रमुख हैं, जिन्हें पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। शूरवीर सजवाण ने ऋषिकेश विधानसभा सीट से नामांकन दर्ज कराया था, लेकिन अंतिम समय पर उन्हें मना लिया गया। इस तरह से एक प्रदेश अध्यक्ष के साथ अब पार्टी में पांच कार्यकारी अध्यक्ष हो गए हैं। वहीं इसी सीट पर शूरवीर का साथ दे रहे राजपाल खरोला को भी संगठन में उपाध्यक्ष पद पर एडजस्ट किया गया है।
लैंसडौन सीट पर तैयारी कर रही ज्योति रौतेला को महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट किया गया है। इस सीट पर पार्टी ने हरक सिंर रावत की पुत्रवधु अनुकृति गुसाई को प्रत्याशी बनाया है। वहीं राजपुर सीट से दावेदारी पेश कर रही कमलेश रमन और कैंट सीट से दावेदारी पेश कर रही आशा मनोरमा डोबरियाल को महिला कांग्रेस में वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर शांत किया गया है। इनके अलावा सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को सचिव पद पर नवाजा गया है। इनमें कुछ पद महामंत्री और प्रवक्ता के भी शामिल हैं।
पार्टी में तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव में निश्चित रूप से इनका लाभ पार्टी को मिलेगा। पार्टी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को यह अधिकार सौंपा है कि वह कार्यकर्ताओं को पदों से नवाज सकते हैं। संगठन में विस्तार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
- मथुरादत्त जोशी, महामंत्री संगठन, पीसीसी