उत्तराखंड आपदा: कुमाऊं मंडल में फंसे 700 से अधिक पर्यटक, कई गांव का संपर्क नैनीताल से कटा
Uttarakhand Disaster News: मूसलाधार बारिश से जिले में अलग-अलग जगह पर्यटक फंस गए थे। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य कर कई जगह से पर्यटकों को निकाल लिया।
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उत्तराखंड में तीन दिन की मूसलाधार बारिश के कारण आई आपदा में बंद हुए रास्ते भले ही अब खुलने लगे हैं लेकिन कुमाऊं मंडल में अब भी 700 से ज्यादा पर्यटक अलग-अलग कारणों से फंसे हुए हैं। इनमें चार विदेशी पर्यटकों के फंसे होने की बात कही जा रही है।
नैनीताल जिले में अब भी 165 से ज्यादा पर्यटक फंसे जिला पुलिस ने बृहस्पतिवार को ऐसे 40 पर्यटकों को बाहर निकाला। कुछ पर्यटकों की गाड़ी का तेल खत्म हो गया था। कुछ पर्यटक पैदल ही निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
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तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश से जिले में अलग-अलग जगह पर्यटक फंस गए थे। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य कर कई जगह से पर्यटकों को निकाल लिया। बुधवार और बृहस्पतिवार को मौसम साफ होने और कई मार्गों के खुल जाने से पर्यटकों को निकालने का काम शुरू हुआ।
एसपी सर्वेश पवार ने बताया कि एसडीएम से संपर्क कर पर्यटकों की गाड़ी में तेल भरवाया गया। पुलिस के अनुसार रामगढ़ में फंसे लोगों को भी पुलिस लगातार निकाल रही है। बीमार लोगों का इलाज भी चल रहा है। सूत्रों के अनुसार चार विदेशी भी फंसे हुए हैं। वे अपने देश जाना चाहते हैं। बागेश्वर जिले में करीब 400 से ज्यादा पर्यटक अब भी फंसे हुए हैं।
20 से अधिक गांव का संपर्क नैनीताल से कटा
रानीकोटा-देवीपुरा सौड़ मोटर मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से कोटाबाग ब्लॉक के 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का संपर्क कोटाबाग और नैनीताल से कट गया है। काश्तकारों की फसलें आपदा में नष्ट हो चुकी हैं। बांसी के बुरासी नाले में बना पुल टूटने की कगार पर है।
कोटाबाग के पर्वतीय क्षेत्र ग्राम पंचायत डोला, रियाड़, जलना, बाघनी, बांसी सौड़ बगड़, ओखलढूंगा, डोन परेवा, गोरियादेव तलिया आदि 20 ग्राम पंचायतों में आपदा से जनजीवन प्रभावित हो गया। जनप्रतिनिधि कृपाल बिष्ट ने डीएम से कोटाबाग के अमगड़ी, डोला और स्यात न्याय पंचायत में तहसीलदार और संबंधित पट्टी पटवारी से सर्वे कराने और आपदा की चपेट में आए ग्रामीणों के मकान, गोशाला और कृषि भूमि की रिपोर्ट बनाकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।