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उत्तराखंड : तीन लाख कर्मचारी पेंशनरों के कैशलेस इलाज में कोविड-19 महामारी का ब्रेक

Wed, 23 Sep 2020 11:31 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 23 Sep 2020 11:31 AM IST
सार

  • डाटा तैयार लेकिन, कोविड के कारण नहीं बनाए जा सके गोल्डन कार्ड
  • कर्मचारी संगठनों से शासन का है एक माह में गोल्डन कार्ड देने का वादा

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Uttarakhand: covid-19 pandemic breaks cashless treatment of three lakh employee pensioners
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रदेश के तीन लाख कर्मचारियों व पेंशनरों को कैशलेस इलाज में कोविड-19 महामारी का ब्रेक लग गया है। अब योजना को शुरू होने में और वक्त लग सकता है। शासन स्तर पर कर्मचारी संगठनों के साथ हुई वार्ताओं में एक माह में गोल्डन कार्ड तैयार कर कर्मचारियों को देने का वादा किया गया था। 24 सितंबर को एक माह पूरा हो जाएगा। लेकिन सचिवालय और कोषागारों में कोरोना संक्रमितों के मामले बढ़ने के बाद योजना को फिलहाल अभी लागू नहीं किया जा सकेगा। 

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उधर, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, कर्मचारियों के कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए तैयारी पूरी है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने लगभग तीन लाख कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों का डाटा नेशनल पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। लगभग साढ़े चौदह लाख गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। कैशलेस इलाज के लिए प्रति माह अंशदान लिया जाएगा। तैयारियों के अनुसार, कर्मचारियों और पेंशनरों को अक्तूबर महीने से कैशलेस इलाज की सुविधा दी जानी थी। अब इसके लिए उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री अरुण पांडेय के मुताबिक, अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कैशलेस इलाज की सुविधा एक महीने के भीतर शुरू करने का वादा किया गया था। 24 सितंबर को एक माह की अवधि पूरी हो जाएगी।
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अधिकांश कर्मचारियों ने जरूरी डाटा भी उपलब्ध करा दिया है। वे गोल्डन कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए। यदि कोविड के कारण कोई दिक्कत है, तो कैशलेस इलाज के लिए कोई न कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

इस योजना में कर्मचारी व पेंशनर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत अस्पतालों में सीधे गोल्डन कार्ड दिखाकर किसी भी बीमारी का इलाज करा सकते हैं। वर्तमान में आयुष्मान योजना में प्रदेश स्तर पर 175 और राष्ट्रीय स्तर पर 23 सौ से अधिक सरकारी व निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। 


कैशलेस इलाज के लिए कर्मचारियों और पेंशनरों का डाटा नेशनल पोर्टल पर भी अपलोड हो गया है। कोविड महामारी के कारण गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने में मुश्किल आ रही है। जल्द ही स्थिति सामान्य होने पर कर्मचारियों और पेंशनरों के कार्ड बनाए जाएंगे।
- डीके कोटिया, अध्यक्ष राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण

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